Poetry

एक निरीह रात – A Painting

एक निरीह रात .. कुछ बात .. आसमाँ में देखो चाँद की बेरुखी ! ये डर ..भय .. रात का सन्नाटा ! ये पुराने पहाड़ों में दफ्न राज आहिस्ता ! ये जिंदगी भी कुछ पहेली से कम नही ! Painting By : Sujit