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शोर ….

(वर्तमान परिदृश्य पर कुछ पंक्तियाँ …… ) कानों पर हाथ रख लेने से शोर खत्म नहीं होता, बस कुछ देर तक ही रोक पाते है, अपने आस पास के कोलाहल को । और फिर बन्द कानों के पार भी उतर जाती है वो आवाजें जो उठती है हक के लिए । विरोध के स्वर को […]