Poetry

ये भागती जिंदगी कहाँ ले जाती ?

फसल सी हिलती डुलती भीड़, सड़कों पर हो आती .. ये पुरानी खेतें .. एक जिंदा शहर बन जाती ! कितनी तंग गलियों से गुजरते गुजरते, दूर जा के ये एक लंबी सी सड़क बन जाती ! पगडंडियों चलता, ऊँची नीची राहों फिसलता; अब सोचता खड़ा वहीं जमीं चलने लग जाती ! कहते दहशतगर्द होंगे […]