Poetry

शतरंज – Night & Pen

कैसे उन दिनों लत सी लग गयी थी,काले और उजले कसीदे से चौकोर खानो में दिमाग दौड़ाने की,ये वो लम्हा था जब पहली बार रूबरू से हुए उस खेल से,जिसके नाम से नसें तनती थी कुछ भारी भरकम होगा,शायद अभी तो ना ही सीख पाउँगा ये सोचा था उसने ! एक दिन कहीं से उसे […]