Poetry

आज देखा हमने तिरंगे का बस दो रंग अपने चेहरे पर ! !

क्यों संसद खामोश और ट्विट्टर चिल्ला रहा , क्या बदनसीबी थी हमारी, हमारा ही रोकेट, हमारे ही घर को जला गया कहीं ! 100 मेडल्स जीते हमने इस बार पर, 100 करोड़ की कीमत चूका गया कोई ! ये कैसी विकास गंगा बहा दी अपने देश मे , अपने ही लोगो का खून सूखा गया […]