Poetry

क्योँ नही बहलाती मुझे माँ !

याद उतनी ही है तेरी इस जेहन में बसी,जैसे तेरी उँगलियाँ छु चल पड़ा इन राहों में ! और ना तुने रोका, कुछ तो कहा होता..में इन राहों में चलता गया, कहाँ निकल आया ! अब क्योँ नही बहलाती मुझे माँ !ना बताती ये रात है, सो जाओ !क्योँ नही डराती उन झूठे कहानियों से,कोई […]

Poetry

Morning Again ..!

शब्द जब रंग मंच पर उतरे !अपने अपने किरदार को खेले ! में खरा वहाँ मुसकाता रहा, हर उलझन को सुलझाता रहा ! ये आहट किस और से आती है !मंजिल ना नजर अब आती है,बस रस्ते पर ले जाती है ! इच्छाओं की झोली में जीता,इस बार भी ये बसंत यूँ बीता !निर्जन पथ […]