पलायन क्यों ??

पलायन क्यों … साढ़े साती सुबह, अलसाती कम्बल, कोई गीत की धुन टकराएँ ऐसे.. तन से मन को वहाँ खीच ले गए जैसे, है ये कौन सी, व्यथा या झूठा Read More …

इंसान हूँ हर पल सम्हलने वाला

मेरे सपनों को जलने दे, यूँ ही मुझे सुलगने दे ! तेरी नियत से क्या वास्ता मेरा, तू पत्थर है, हर कदम गिरने वाला, में इंसान हूँ हर पल सम्हलने Read More …

रंग फीका फाल्गुन !

चहुतेरे कूके कोयल, बहका बहका शिशिर, महका महका बसंत, चहका चहका फाल्गुन ! गलीचे में छुपा गम ही गम, कहना कैसा १०० भी है कम, [ कुछ आती घर की Read More …

लालटेन तले.. !

शाम की धमाचौकरी को एक फटकार विराम लगाती थी, पैर पखारे सब लालटेन तले अपनी टोली सी बन जाती थी! जोर जोर से पड़ते थे, हिंदी की किताबे.. लगता था Read More …