Poetry

होली – इन आँखों में जो रंग है – My Holi 2010


होली रंगों के त्यौहार पर –

अपने घर से दूर मेरे मन ने रंगा दिया कई रंगों में ..

हम रंगों से दूर उमंगो से दूर ! !

वो क्या था होली का सुरूर ! !
थी ध्माचौकरी घट घट पर ,
थे सने रंग गुलाल हर अम्बर पर ! !
नाच उठे बच्चे, बूढ़े और जवान ,
जो गी रा सा रा ने जब छेरा गान ! !
इस होली पर उस होली की ,
यादें जो मेरी रंगी रहीं ! !
इन आँखों में जो रंग है ,
चलो वो होली का ही सही ! !

रचना : सुजीत कुमार लक्की

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

4 thoughts on “होली – इन आँखों में जो रंग है – My Holi 2010

  1. बढ़िया

    ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
    प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
    पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
    खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.

    आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

    -समीर लाल ’समीर’

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