Poetry

सपनों के बुलबुले – Dream Bubbles


बुलबुले बेचते वो राहों पर ..
बुलबुले के बदले रोटी !
रिश्ता अजीब लगता पर,
बहुत संजीदा नाता उसका !

दो चार बुलबुले उड़ाते,
बहल जाते राहगीर मुसाफिर,
मकसद होता दो चार पैसे !
पूछते उम्मीदी नजरों से,
ले लो ये बुलबुले …
और फिर जोर एक फूँक से,
कई बुलबुले खुले आसमानों में,

सब ख़ुशी से देखते बस,
मुस्काते बच्चे कौतुहल भरे !

फिर हिल जाता सिर,
ना ना दुत्कार वाला,
कतरा जाती आँखें,
फिर बढ़ जाता आगे,
उड़ाते छल्ले बनाते बुलबुले,
देखो सपनों की फुहारें उड़ रही !

एक सवाल सा दो चार रुपये में,
क्यों नहीं बना लेते सपनों की फुहारें,
करोड़ो की आलीशान राह वालों !

देखता फिर चट दरकिनार,
रफ्ता रफ्ता हो किनारे..
फिर बारी अगले काफिले की,
सपनों के बुलबुले पर रोटी तो मिले ?

# सुजीत …

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/