Poetry

आज हम यूँ भीगे जी भर के – A Day In Rain

आज हम भीगे यूँ जी भर के …
ना डर था कोई रोक लेगा आ के हमे !
ना डर था माँ डाटेंगी यूँ भीगे कपड़ो को देख कर !
ना कोई लपक के सहलायेगा भीगे बालों को ,
ना मिल जायेगी, कोई गर्म प्याली चाय की ..
बस नजाने क्यूँ दो चार बुँदे ,
आँखों से फिसल गयी इस बरसात में !
बस आज हम भीगे यूँ जी भर के ऐसे ..
रचना : सुजीत कुमार लक्की


Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

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