आज हम यूँ भीगे जी भर के – A Day In Rain

आज हम भीगे यूँ जी भर के …
ना डर था कोई रोक लेगा आ के हमे !
ना डर था माँ डाटेंगी यूँ भीगे कपड़ो को देख कर !
ना कोई लपक के सहलायेगा भीगे बालों को ,
ना मिल जायेगी, कोई गर्म प्याली चाय की ..
बस नजाने क्यूँ दो चार बुँदे ,
आँखों से फिसल गयी इस बरसात में !
बस आज हम भीगे यूँ जी भर के ऐसे ..
रचना : सुजीत कुमार लक्की


Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

4 thoughts on “आज हम यूँ भीगे जी भर के – A Day In Rain

    वीना

    (September 22, 2010 - 4:29 pm)

    भावपूर्ण अभिव्यक्ति
    http://veenakesur.blogspot.com/

    सुलभ § Sulabh

    (September 23, 2010 - 3:34 am)

    भावुक कर दिया !!

    क्षितिजा ....

    (September 24, 2010 - 3:04 am)

    बस नजाने क्यूँ दो चार बुँदे ,
    आँखों से फिसल गयी इस बरसात में !

    wah … kya baat hai … bahut bhavpoorn …

    gyanipandit

    (December 18, 2016 - 11:59 am)

    aapki rachana pdhakar aisa lagta hain ki ek bar fir bachche bankar barish main bhige.

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