आई रे आई ये रिमझिम फुहार ! ! – It’s A Rainy Day


यूँ बैठे थे की हवाओ ने रुख बदला और कुछ फुहारों ने मन को हर्षित कर दिया और कुछ मन मे आये भाव…

देखो बह रही ये कैसी बहार,
बरसी है तन पे ये भीगी फुहार !

यूँ निहारे वो मन को और गाये ये राग,
बरसों यूँ मेघा कर दो शीतल तुम आज !

छोरे तपिश को, नाचे हम आज,
आई रे आई ये रिमझिम फुहार !

रचना : सुजीत कुमार लक्की

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