आई रे आई ये रिमझिम फुहार ! ! – It’s A Rainy Day


यूँ बैठे थे की हवाओ ने रुख बदला और कुछ फुहारों ने मन को हर्षित कर दिया और कुछ मन मे आये भाव…

देखो बह रही ये कैसी बहार,
बरसी है तन पे ये भीगी फुहार !

यूँ निहारे वो मन को और गाये ये राग,
बरसों यूँ मेघा कर दो शीतल तुम आज !

छोरे तपिश को, नाचे हम आज,
आई रे आई ये रिमझिम फुहार !

रचना : सुजीत कुमार लक्की

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

5 thoughts on “आई रे आई ये रिमझिम फुहार ! ! – It’s A Rainy Day

    संजय भास्कर

    (June 13, 2010 - 12:00 pm)

    किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

    संजय भास्कर

    (June 13, 2010 - 12:05 pm)

    वाह ! कितनी सुन्दर पंक्तियाँ हैं … मन मोह लिया इस चित्र ने तो !

    Anonymous

    (July 20, 2010 - 11:31 am)

    wowwwwwwwwwwwwwwwwww

    Anonymous

    (August 22, 2010 - 1:26 pm)

    oh la laaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa!!!!!!!!!!

    shiwaniswaraj

    (December 5, 2010 - 1:42 pm)

    wow lucky bhaiya aap to poet ban gaye

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