Poetry

नया चाँद …

बालों के गुच्छों में एक चाँद है, जो कंधे पर सर रखके, सुकून के तरीके तलाशता है, सुबह सुबह घूँघट डाले आधे चेहरे तक, बरामदे पर धीमे क़दमों से चलती है, किसी कोने में खड़े हो देखा है, उसे बड़े लहजे से चाय पीते हुए, दो चार घूंट के बाद जब नजर उठती, टकड़ा जाती […]