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नया चाँद …

new moonबालों के गुच्छों में एक चाँद है,
जो कंधे पर सर रखके,
सुकून के तरीके तलाशता है,
सुबह सुबह घूँघट डाले आधे चेहरे तक,
बरामदे पर धीमे क़दमों से चलती है,
किसी कोने में खड़े हो देखा है,
उसे बड़े लहजे से चाय पीते हुए,
दो चार घूंट के बाद जब नजर उठती,
टकड़ा जाती है आँखें उसके चेहरे से,
वो रोक देती है कप को होठों तक,
जैसे किसी इजाजत के इन्तेजार में,
रुक गए हो हाथ उसके !

कभी कभी दोपहर में दोनों हाथों को,
बरामदे के रेलिंग पर रख कुछ सोचती है,
शायद नया आँगन कुछ अनजान सा लगता होगा,
किसी के आने की आहट सुन,
सकपकाते खींच लेना वापस घूँघट को,
सीख लिया है उसने रिवाजों को अपने लहजे में !

बस बाँहों की गिरफ्त ही नहीं आये उसके हिस्से,
कंगन बिंदी नये संवाद सबको ही अब चुन लिया उसने,
नये नये गगन में अब एक नया चाँद उग आया था !

#SK