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किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? #AutumnDays

Autumn marks the transition from summer into Winter ….. किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ?

Autumn Days Thoughts
ढलती रात अभी की, जैसे हवायें खुले खुले बदन से टकराकर अटखेली करती प्रेमिका सी लिपटती ; दूधिया रोशनी में नहायी सड़के और आसमां की खूबसूरती जैसे गुलज़ार की नज्म, उस नज्म से जैसे चाँद आसमां से उतरकर आपके बगल में आ बैठा ! जेठ की दोपहर के बाद जैसे रात का अहसास आज ही हुआ हो, उमस और तपिश के बाद पहली ओस की फुहार, किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

छत की मुंडेरों से घंटों देखना सड़क की ओर आते जाते अजनबी चेहरों में कुछ खोजने का कौतुहल, जैसे उसके चेहरे पर कुछ लिखा हो और असफल सी कोशिश उसे पढ़ने का ! आधी सी ठंड पर लिपटती आधी सी लिपटती चादर, जैसे चाहत हो कोई अधूरी सी ! कुछ रात ढलने पर पर उपजी सन्नाटों पर दूर कहीं निकल जाने का मन जैसे मन कुछ तलाशना चाहता हो !
किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

#Autumn #SK

गाड़ी – (#MicroPoetry)

ऊँची लम्बी गाड़ी,
खूब जोर का हॉर्न बजाती,
बगल में आके झटके से ब्रेक लगाती,
दिल धक् से रह जाता उस वृद्ध का,
अंदर गाड़ी से ठहाके की आवाज आती है ….

micropoetry