Poetry

एक रात शहर की – Devils of Dark Night …!

जब रात तमस बड़ी गहरी थी,सहमी सी और सुनी थी ! घना अँधेरा धरा पर आता,शहर घना जंगल बन जाता ! मद में विचरते कुंजर वन में,विषधर ब्याल रेंगते राहों में ! दनुज सीमा के पार गया,कुहुकिनी का स्वर भी हार गया ! विवश ईश तुम चुपचाप रहे,अब मानव से फिर क्या आस रहे ! […]