ख़ामोशी लिपटी थी ….

कुछ यूँ बीती रात लंबी हो चली थी,दबा रखे थे सवाल कई.. तुमसे पूछेगे..!आज कोई फिर आके आवाज दे गया जैसे ! हो फिर मोह कोई तुझसे,या तृष्णा कुछ, जो Read More …

मन – An Inner Inner Conscience

सुनी सी ये शाम है अब की,दिन दुपहरी लगती वैशाखी ! कुछ रंग फीके लगते इस जग के,ये मन अपना किस तलाश में भागे, कभी कोसता नाकामी पल को,लगा सपनों Read More …