Poetry

ख़ामोशी लिपटी थी ….

कुछ यूँ बीती रात लंबी हो चली थी,दबा रखे थे सवाल कई.. तुमसे पूछेगे..!आज कोई फिर आके आवाज दे गया जैसे ! हो फिर मोह कोई तुझसे,या तृष्णा कुछ, जो छुपी हो कबकी! फिर कहीं अपनी ही बात,हम मुग्ध हो बावरी बातों पर,भूली पिछली हर यादों पर ..! ये कैसे रोक दिया इन तूफानों को,और […]

Poetry

मन – An Inner Inner Conscience

सुनी सी ये शाम है अब की,दिन दुपहरी लगती वैशाखी ! कुछ रंग फीके लगते इस जग के,ये मन अपना किस तलाश में भागे, कभी कोसता नाकामी पल को,लगा सपनों की पंख उड़ने को ! ख्वाब सजाता साथ हो कोई,ख़ामोशी में सुना बन कोई ! दीखते बदले रंग चेहरों की,एक जरिया ढूंढे खो जाने की […]