Poetry

मेरी बात .. अब तेरी बात – Participation in Facebook Virtual Poetry Meet

मेरी बात ..अब तेरी बात .. मेरा दर्द .. अब तेरा दर्द .. कुछ चंद लम्हों के लिए ही सही , ऐसी कुछ बिछी बिसात थी ! ~ दिन काली .. रात नीली .. कैसी ये बात थी .. उम्मीदों के महल ढह ढह रहे थे धीरे धीरे .. अब बस धीमी धीमी सी एक […]

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आज देखा हमने तिरंगे का बस दो रंग अपने चेहरे पर ! !

क्यों संसद खामोश और ट्विट्टर चिल्ला रहा , क्या बदनसीबी थी हमारी, हमारा ही रोकेट, हमारे ही घर को जला गया कहीं ! 100 मेडल्स जीते हमने इस बार पर, 100 करोड़ की कीमत चूका गया कोई ! ये कैसी विकास गंगा बहा दी अपने देश मे , अपने ही लोगो का खून सूखा गया […]

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शब्द कोरे हो चले है ..

शब्द कोरे हो चले है .. कुछ फासला बड़ा है .. कोई जो बढ़ चला है .. जो रात रहता था साथ मेरे .. अब वो भी सो चला है.. रास्ते मुझपर हंस पड़े है .. अब कोई पगडंडियों पर जो चल परा है .. अपनी ही परछाई ओझल हो गयी है .. ख़ामोशी का […]

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दीवार के उस पार खड़ा अपना बचपन ! !

रोज का एक आम दिन …. अभी थोरा ही झुका था सूरज उस सामने पेड़ की झुरमुट में , भागे भागे ऐसे जैसे चार पर टिकी घड़ी, अब रुकेगी नही .. किताबो को बिस्तरों के सहारे, यूँ लिटाया, जैसे गिरने गिरने पर हो , वो कोने में टिकाये रखा क्रिकेट का बल्ला , कल शाम […]