Monthly Archives: August 2010

I am competing with Myself – Life Motivating Poem By हरिवंश राय बच्चन

वक्त के किसी दोराहे पर खरे !
अच्छाई और बुराई के अंतरद्वंद में घिरे !
हरिवंश राय बच्चन जी की कुछ पंकियो को ,
आप अपने जिंदगी के बहुत करीब पाओगे !
शायद कई उलझे सवालो का जवाब इस कविता में है !!


मैंने शांति नहीं जानी है !– हरिवंश राय बच्चन

मैंने शांति नहीं जानी है !
त्रुटि कुछ है मेरे अन्दर भी ,
त्रुटि कुछ है मेरे बाहर भी ,
दोनों को त्रुटि हीन बनाने की मैंने मन में ठानी है !
मैंने शांति नहीं मानी है !
आयु बिता दी यत्नों में लग ,
उसी जगह मैं , उसी जगह जग ,
कभी – कभी सोचा करता अब , क्या मैंने की नादानी है !
मैंने शांति नहीं जानी है !

पर निराश होऊं किस कारण ,
क्या पर्याप्त नहीं आशवासन ?
दुनिया से मानी , अपने से मैंने हार नहीं मानी है !
मैंने शांति नहीं जानी है

प्रेषित : सुजीत कुमार लक्की

गर्व हमे की हमने तो भारत भूमि पर जन्म है पाया ! !

गर्व हमे की हमने तो भारत भूमि पर जन्म है पाया ,
बचपन से ही इस माटी में लोट पोट इठलाया !

जरा देखो कृषक की बातो को, इनके सीनों पर हल को चलाया,
और ने माँ ने फिर भी दोनों हाथो से, हमको अन्न खिलाया !

गौरवमयी इतिहास…

इस धरा की शान की खातिर कितनो ने खून बहाया ,
क्या भगत क्या बोस कहे, हँस हँस कर प्राण गवांया,
रक्त सनित इस भूमि पर हँस के फूल खिलाया !

आज का परिदृश्य …

आज देखो इन नजरो में कैसा आतंक है छाया,
ऐसी भी क्या बात हुई भाई ने भाई का खून बहाया !

है एक तुच्छ नमन मातृभूमि चरणों में …
गर्व हमे है हमने तो भारत भूमि पर जन्म है पाया..
बस ये स्वदेश है अपना, मन ने आवाज लगाया !

स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये ! ! – सुजीत