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तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले – A Thought

तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले ,
हाथ छोर कर जो चला हु तेरा !

परेशा ना हो  मेरी गिरते सम्हलते कदमो पर ,
कदम जब बढ़ा ही दिया अब चल परेगा ही ये सिलसिला ! !

खवाहिश ही कब की मंजिलो को नापने की ,
बस चला हूँ .. और चलता रहे ये काफिला ! !

रचना : सुजीत कुमार लक्की