साल 2025 का सफ़र का अंत एक यादगार यात्रा से हुई — भागलपुर से हावड़ा तक की ट्रेन यात्रा के साथ। जैसे ही ट्रेन हावड़ा स्टेशन पहुँची, एक अलग ही ऊर्जा महसूस हुई। स्टेशन की हलचल, लोगों की आवाज़ें और इतिहास की खुशबू… यहीं से कोलकाता की कहानी शुरू होती है।
हावड़ा से टैक्सी लेकर हम पहुँचे दक्षिणेश्वर काली मंदिर। हुगली के किनारे स्थित यह मंदिर मन को तुरंत शांति से भर देता है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक दिव्य अनुभूति होती है — सकारात्मक ऊर्जा, श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम। ऐसा लगा मानो समय कुछ पल के लिए थम गया हो और मन पूरी तरह स्थिर हो गया हो।
मंदिर दर्शन के बाद कोलकाता की गलियों में बसे होटल में ठहरना अपने आप में एक अनुभव था। संकरी गलियाँ, पुराने मकान, सड़क किनारे चाय की दुकानें और स्थानीय लोगों की सहज मुस्कान — यही है असली कोलकाता।

खाने की बात करें तो यहाँ का लोकल फूड दिल जीत लेता है — पूरी-सब्ज़ी, समोसा, मूरी (मुरमुरा), और बंगाली स्वाद की पहचान मछली-चावल। हर निवाला जैसे शहर की संस्कृति को महसूस कराता है। कहीं दूर से रवींद्र संगीत की मधुर धुन सुनाई देती है, जो पूरे माहौल को और भी भावनात्मक बना देती है।
अगला पड़ाव था हुगली नदी में फेरी राइड। पुरानी विंटेज नाव में बैठकर हुगली की लहरों के साथ बहते हुए बेलूर मठ पहुँचना एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। रास्ते में हावड़ा ब्रिज का दृश्य, नदी का विस्तार और ठंडी हवा मन को भीतर तक सुकून दे रही थी।
बेलूर मठ, रामकृष्ण परमहंस का आश्रम, अपने आप में शांति का प्रतीक है। हुगली घाट के पास हरियाली, स्वच्छता और शांत वातावरण — यह जगह मन, विचार और आत्मा तीनों को विश्राम देती है। यहाँ बैठकर कुछ पल मौन रहना ही ध्यान बन जाता है।
कोलकाता की पहचान मेट्रो से बेहतर कहीं और नहीं झलकती। दक्षिणेश्वर से मैदान तक मेट्रो यात्रा बेहद सहज और आनंददायक रही। इसी सफ़र में हम पहुँचे बिड़ला ऑडिटोरियम, जहाँ खगोलीय (Astronomical) शो ने ब्रह्मांड की विशालता और मानव की जिज्ञासा को एक नई दृष्टि दी।
शाम होते-होते पार्क स्ट्रीट का नज़ारा बिल्कुल अलग था। क्रिसमस और न्यू ईयर के मौके पर रंग-बिरंगी लाइट्स, सजावट, संगीत और भीड़ — पूरा इलाका उत्सव में डूबा हुआ था। यह सच में “सिटी ऑफ जॉय” होने का एहसास कराता है।
खरीदारी के बिना कोलकाता अधूरा है। एस्प्लानेड, चांदनी चौक, मार्क्विस स्ट्रीट, हॉग मार्केट, संपर्क मॉल, सत्यानारायण मार्केट, न्यू मार्केट और बड़ा बाज़ार — हर बाज़ार की अपनी अलग पहचान और रौनक है। कहीं सस्ते सौदे, कहीं पारंपरिक चीज़ें, तो कहीं आधुनिक शॉपिंग का अनुभव।
रात के समय क्वेस्ट मॉल और फोरम कोर्टयार्ड में हैंगआउट ने यात्रा को और भी खास बना दिया। रोशनी, कैफ़े, लोग और बातचीत — सब कुछ यादों में बस गया।
यह कोलकाता ट्रिप 2025 सिर्फ़ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि संस्कृति, इतिहास, आध्यात्म और उत्सवों से भरा एक अनुभव था। नए साल की शुरुआत सिटी ऑफ जॉय से करना अपने आप में सौभाग्य की बात रही।
यह सफ़र यादों में हमेशा ज़िंदा रहेगा — एक ऐसा अहसास, जिसे बार-बार याद किया जाएगा।