Stories

एन इवनिंग इन मेट्रो – मेट्रोनामा !!

इक ऐसी ही शाम रोजमर्रा की .. नियत समय से मेट्रो में अपने गंतव्य की ओर जाने को आतुर और दुनिया भर की बातों की धुनी जमाए अपने कार्यस्थल के मित्रों के साथ .. निशांत, आदर्श, दिनेश !ऐसे ही कुछ पड़ाव पार करने पर फोन की ट्रिन ट्रिन; बातचीत में विराम सा लगाती; राज का […]

Night & Pen

कितना एकाकी है इस भागदौर में इंसान ?? – Thought with Night & Pen

कितना एकाकी है इस भागदौर में इंसान ; अनमने ढंग से सुबह में अपने आपको इस भीर के लिये तैयार करता हुआ ! महानगर की जिंदगी .. वक्त की कमी और ऊहापोह ने सब रिश्तों को बदल दिया है ! जिंदगी जीने की पूरी रुपरेखा तो बुन लेते, प्रोफेशनलिज्म में सराबोर करते जाते अपने आप […]

Poetry

ये भागती जिंदगी कहाँ ले जाती ?

फसल सी हिलती डुलती भीड़, सड़कों पर हो आती .. ये पुरानी खेतें .. एक जिंदा शहर बन जाती ! कितनी तंग गलियों से गुजरते गुजरते, दूर जा के ये एक लंबी सी सड़क बन जाती ! पगडंडियों चलता, ऊँची नीची राहों फिसलता; अब सोचता खड़ा वहीं जमीं चलने लग जाती ! कहते दहशतगर्द होंगे […]