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जिंदगी ऑनलाइन ……

टीवी पर कोई कार्यक्रम ना भी देख पाये कोई बात नहीं .. पर ऑनलाइन नोटीफिकेशन ना मिस हो .. ये ट्विट्रर फेसबुक की दुनिया ! कितना भी कह ले आभाषि छद्म पर इन तस्वीरों से बने सजे प्रोफाइलों के पीछे कोई शख्स होगा ही जो सोचता, बोलता, लिखता, रोता .. हँसता .. कुछ उसके ख्वाब […]

मायूसी को हँसी बनाएँ – Let’s Live Our Life Each Day With A Smile

खुशी की क्या परिभाषा .. और हर हमेशा घिरे महसूस करते जिससे यही है गम ? याद है .. कब पढ़ी थी पिछले दफा किताब की दस पंक्तियाँ सुकून के साये में ! कितने उलझते जा रहे है इस आपा धापी में .. कितना ? ये भी तो सोचने का वक्त नहीं ! मायूसी को […]

रोजमर्रा – In Night & Pen With #SK

मैं किसी पंक्ति में खरा कुछ वार्तालाप सुनता जा रहा था; रोज में सुबह जा भीड़ में खो जाता, पढ़ने की कोशिश करता कुछ देर के वक्त में अनेकों अजनबी चेहरों को ! कुछ चेहरों की रोज पुनरावृति भी होती, रोज के मुसाफिर होंगे इस जगह से रोज जातें होंगे; इस शहर की किसी ओर […]

जिंदगी अपनी है सवाल भी अपने – Outside Your Comfort Zone

कुछ संदेह मन में .. कुछ स्थायित्व की कमी यूँ तो लगता जैसे एक दोष हो जिंदगी के लिये ! पर एक गहराई से देखे तो हमारी जिंदगी को यही संदेह और स्थायित्व की कमी रफ़्तार देते ; देते एक उम्मीद चलने की, एक हौसला आगे बढ़ने की ! विस्तृत रूप में देखे और सोचे […]

गंतव्यविहीन … In Night & Pen

लंबी समांतर रेखा खींचता हुआ ये काफिला जिंदगी का बहुत दूर हो आया था; ऐसे कितने दफा कोशिश की, साथ साथ चलती ये रेखाएँ काट के निकल जाये, अपने गंतव्य की ओर, ये समांतर चलना निश्चित दूरियों को बनाएँ, और नजदीकियों को भी ! बहुत कशमकश से शब्दों को बुनता हुआ; लिपट जाता किस पशोपेश […]

Reprise Something – Night & Pen

बहुत द्वंद और एक बोझ जैसे पर्वतों की श्रृंखला, और रेगिस्तान सी राह में दूर जाता एक राही; विस्तृत अथाह सी राह में कभी इतना पीछे रह जाता; की चलना मुश्किल सा प्रतीत लगता ! कब तस्सली हो, भागते भागते ! कितने सवाल है ….. फैसलों पर .. क्योँ ऐसा लगता मौसम बेजार हो इर्द […]