Night & Pen

रोजमर्रा – In Night & Pen With #SK

मैं किसी पंक्ति में खरा कुछ वार्तालाप सुनता जा रहा था; रोज में सुबह जा भीड़ में खो जाता, पढ़ने की कोशिश करता कुछ देर के वक्त में अनेकों अजनबी चेहरों को ! कुछ चेहरों की रोज पुनरावृति भी होती, रोज के मुसाफिर होंगे इस जगह से रोज जातें होंगे; इस शहर की किसी ओर […]

Thoughts Work & Life

जिंदगी अपनी है सवाल भी अपने – Outside Your Comfort Zone

कुछ संदेह मन में .. कुछ स्थायित्व की कमी यूँ तो लगता जैसे एक दोष हो जिंदगी के लिये ! पर एक गहराई से देखे तो हमारी जिंदगी को यही संदेह और स्थायित्व की कमी रफ़्तार देते ; देते एक उम्मीद चलने की, एक हौसला आगे बढ़ने की ! विस्तृत रूप में देखे और सोचे […]

Night & Pen

गंतव्यविहीन … In Night & Pen

लंबी समांतर रेखा खींचता हुआ ये काफिला जिंदगी का बहुत दूर हो आया था; ऐसे कितने दफा कोशिश की, साथ साथ चलती ये रेखाएँ काट के निकल जाये, अपने गंतव्य की ओर, ये समांतर चलना निश्चित दूरियों को बनाएँ, और नजदीकियों को भी ! बहुत कशमकश से शब्दों को बुनता हुआ; लिपट जाता किस पशोपेश […]

Night & Pen

Reprise Something – Night & Pen

बहुत द्वंद और एक बोझ जैसे पर्वतों की श्रृंखला, और रेगिस्तान सी राह में दूर जाता एक राही; विस्तृत अथाह सी राह में कभी इतना पीछे रह जाता; की चलना मुश्किल सा प्रतीत लगता ! कब तस्सली हो, भागते भागते ! कितने सवाल है ….. फैसलों पर .. क्योँ ऐसा लगता मौसम बेजार हो इर्द […]

Night & Pen

An Autumn Dreams – In Night & Pen With #SK

कल की दबी बिसरी झुंझलाहट; सुबह भी जारी थी सीढ़ियों से उतरते, घुमावदार बोझ सी लगती, ये चडाव और उतार सीढ़ियों की !झुंझलाहट उतार भी दे किसपर; उसपर जो अनसुना था मेरे बातों से ! शाम सड़क पर जैसे साल का अंतिम पड़ाव, उसके बचे कुछ महीने !मौसम भी जैसे यादों का एक कोना छुपाये, […]

Random Thoughts Thoughts

4th Floor Thoughts !

The Age of Orthodox thinking…But where we stand; Our Country lost the credentials of New Facet of Innovation. Are we facing the Mind Drain or Influenced with Amplification of Physical Amenities and Glitz of Modernisation? “On 4th Floor in Front of PC; the thoughts which create anxiety in mind, Questioning with our soul. Our doing […]