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आई रे आई ये रिमझिम फुहार ! ! – It’s A Rainy Day

यूँ बैठे थे की हवाओ ने रुख बदला और कुछ फुहारों ने मन को हर्षित कर दिया और कुछ मन मे आये भाव… देखो बह रही ये कैसी बहार, बरसी है तन पे ये भीगी फुहार ! यूँ निहारे वो मन को और गाये ये राग, बरसों यूँ मेघा कर दो शीतल तुम आज ! […]

अब मुझे इन्तेजार कहाँ ! – A Poem

अब मुझे कोई इन्तेजार कहाँ ! तेरी मायूसी का ऐतबार कहाँ ! यूँ भागे है किस तरफ तब से , की अब हमे चैन कहाँ ! पिघल जाये ये दिल आंसुओं  से , पर उन्हें रोकने वाले हाथ कहाँ ! क्यों रुक जाये हम जाने से ,  मुझे रोकने वाले वो आवाज कहाँ !  अब […]

तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले – A Thought

तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले , हाथ छोर कर जो चला हु तेरा ! परेशा ना हो  मेरी गिरते सम्हलते कदमो पर , कदम जब बढ़ा ही दिया अब चल परेगा ही ये सिलसिला ! ! खवाहिश ही कब की मंजिलो को नापने की , बस चला हूँ .. और चलता रहे ये […]

शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे – A Random Thoughts

शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे ,पर कुछ बातें तो निकली जुबान से ! अनसुनी न थी बातें मेरी ,मगर गुस्ताख़ी का नाम दे गये ! यूँ तो फिदरत ही नही समझाने की,कहते कहते बस एक अंजाम दे गए ! रचना : सुजीत कुमार लक्की

होली – इन आँखों में जो रंग है – My Holi 2010

होली रंगों के त्यौहार पर – अपने घर से दूर मेरे मन ने रंगा दिया कई रंगों में .. हम रंगों से दूर उमंगो से दूर ! ! वो क्या था होली का सुरूर ! ! थी ध्माचौकरी घट घट पर , थे सने रंग गुलाल हर अम्बर पर ! ! नाच उठे बच्चे, बूढ़े […]

एक दिन गुलाबी शहर जयपुर में – MY Jaipur Visit

शांति सादगी का प्रतीक ! ! गुलाबी शहर जयपुर दोस्तों के संग एक खुशनुमा सुबह और उनमे खो गयी गुलाबी शहर की यादें ! प्राचीन धरोहर को संजोती ये धरती ! मैं एक दिन गुलाबी शहर जयपुर में ! – : सुजीत कुमार लक्की