Poetry

प्रेम …

मैं उससे लड़ता हूँ, की थोड़ी सी ख़ामोशी तो हो, तुझे सोच सकूँ किसी नज्म की तरह, और तुझसे कहूँ तू खूबसूरत है शब्दों सी ! अल्लहड़ जैसे हरदम बोलना, जैसे हवा आयी हो खिड़की से और मेज पर से सारे पर्चे उड़ा गयी ! हरदम जिद और जिरह की बातें, जैसे कोई शरारती बच्चा […]