DILUTE LOVE POETRY
Poetry

किसी भी लहजे में नहीं ….

किसी भी लहजे में तो नहीं कहा, की तुम्हारी कई बातें अच्छी नहीं, झुंझलाहट भरी थी चुप्पी तेरी, प्रेम में डूब के कैसे कहता की, कुछ द्वेष भी तो पलने लगा अंदर, कैसे बदलने लगा था व्वयहार तेरा, बदल के तुम वो नहीं रहे अब, या बदल के अब कैसे हो गए, यहाँ कौन निर्धारण […]

sujit hindi poetry on night talk
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और तब …

और तब से आगे का किस्सा ? जहाँ रात को रोक के कल, हम और तुम कहीं चले गए थे, उस चाँद को गवाही बनाके, की फिर इसी वक़्त रोज, यहीं आ बैठेंगे और पूछेंगे तुमसे, और तब ? थोड़ी देर तुम सोचो, थोड़ी देर मैं भी कुछ, फिर तुम भी कुछ कहना, फिर मैं […]