Poetry

गुस्सा …..

तुम मिलो मुझसे कहीं,मैं नजरे छुपाऊ,तुम पूछो कुछ तो,मैं अनजान हो जाऊ ! तुम मिलो जब,मैं कहूँ तुमसे,तुम कौन हो,तुम क्या लगते मेरे,और दूर चला जाऊ ! तुम मिलो जब,पुराना बचा हुआ,गुस्सा दिखलाऊं, तुम अब मत मनाओ,न मैं फिर मान जाऊ ! तुम कभी मत आओ,ये गुस्सा है मेरा,घुटने तो तपने दो,संवेदना के गुनाह में,हरपल […]

My Voice Thoughts

#ThankYouSachin

देखते होंगे क्रिकेट पहले भी लोग, लेकिन साँसें रोक के, चाय की दुकान पर, मन में भगवान को याद करके, दोस्तों के कंधे पर हाथ रख के, पिताजी के साथ सोफे पर बैठ करके, टीवी की दुकान के बाहर भीड़ में शामिल हो, हॉस्टल में टीवी का जुगाड़ करके, बिजली कटने पर बेशर्म हो पड़ोसी […]

hindi poetry on come back love
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तुम बेवजह ही आ जाओ …

मेरे पास वजह नहीं कोई, तुम बेवजह ही आ जाओ, आके खोलो फिर पोटली, यादों की पोटली मैं भी खोलूँ, तुम रूठना निकालों उससे, मैं मनाने की कोई तरकीब, तुम उदासी का चेहरा निकालों, मैं हँसी वाला कोई किस्सा । मेरे पास वजह नहीं कोई, तुम बेवजह ही आ जाओ, तुम जो छोड़ के गए […]

indian summer poem
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निर्जन मन …

आजकल का मौसम, दिन भर जलती हुई पछिया हवा, निर्जन सड़के, चिलचिलाती धुप, बेजार मन ! एक कविता इसी संदर्भ में … सड़कों पर रेगिस्तान उतर आया है, पछिया बयार का तूफ़ान उतर आया है ! सूखे पत्तों से, भर गई है गलियाँ और मुंडेरे, धूलों का आसमान उतर आया है ! परदे आपस में […]

sky as canvas thoughts
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आसमान और कैनवास

मेरे शहर के ऊपर, रोज कोई कैनवास लगाता है, रोज सोचता हूँ देखूँगा उसकी सूरत, वो रोज कुछ न कुछ बना के चुपके से चला जाता, बड़ी बड़ी रंगों की शीशी और बड़े बड़े ब्रशों को लाता होगा अपने साथ, आखिर इतना बड़ा आसमां जो रंगता है वो, कोई कहता है खुदा ईश्वर है वो, […]

hindi poem on selfishness
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खुदगर्ज़ ….

कितना खुदगर्ज़ दिन है चुपचाप से रोज बीत जाता न शाम से कुछ कहता, और रात तो कबसे खामोश सी है । इन तीनों का कुछ झगड़ा सा है, कोई किसी से नहीं मिलता, बस उम्र गुजारने का हुनर सीखा है सबने, कबसे ही अलग अलग जिये जा रहे । कुछ तुमने भी तो इनसे […]