Monthly Archives: April 2016

गुस्सा …..

gussa-poemतुम मिलो मुझसे कहीं,
मैं नजरे छुपाऊ,
तुम पूछो कुछ तो,
मैं अनजान हो जाऊ !

तुम मिलो जब,
मैं कहूँ तुमसे,
तुम कौन हो,
तुम क्या लगते मेरे,
और दूर चला जाऊ !

तुम मिलो जब,
पुराना बचा हुआ,
गुस्सा दिखलाऊं,
तुम अब मत मनाओ,
न मैं फिर मान जाऊ !

तुम कभी मत आओ,
ये गुस्सा है मेरा,
घुटने तो तपने दो,
संवेदना के गुनाह में,
हरपल तपता रह जाऊ !

#SK

#ThankYouSachin

देखते होंगे क्रिकेट पहले भी लोग, लेकिन साँसें रोक के, चाय की दुकान पर, मन में भगवान को याद करके, दोस्तों के कंधे पर हाथ रख के, पिताजी के साथ सोफे पर बैठ करके, टीवी की दुकान के बाहर भीड़ में शामिल हो, हॉस्टल में टीवी का जुगाड़ करके, बिजली कटने पर बेशर्म हो पड़ोसी के यहाँ जाके, राह चलते कान में रेडियो सटाके, आते जाते स्कोर क्या है पूछ्के नजाने किस किस तरीके से क्रिकेट देखने के इस नये नजरिया का नाम था “सचिन”. इस खिलाडी ने पुरे देश को एक साथ आके क्रिकेट देखना सिखाया, आँखों में जीत के सपने को तैरना सिखाया, ख़ुशी पर एक साथ सब भूल के झूमना सिखाया ! हार की मायूसी में गमगीन होना भी सिखाया ; सचिन आला रे पर कदमों को थिरकना सिखाया !

सचिन क्या था ~ किसी के रूम के दीवारों पर क्रिकेट सम्राट से निकाला गया पोस्टर, या किसी के सिरहाने में अख़बार से काट कर रखे गए हजारों तस्वीर का गुच्छा, या सचिन के बाल-बाल आउट होने से बचने पर धक से रह जाता सीना, सचिन के आउट होने पर रोने सी शक्ल का हो जाना, या सचिन के गलत आउट दिए जाने पर गुस्से से भर जाना ! आखिर सचिन क्या था ! कैसे कोई खेलते खेलते आँखों में बस जाता झुक के फ्लिप, आगे बढ़ के ड्राइव, हुक करके छक्का, नजाकत का स्टेट ड्राइव, छेड़ने जैसे अपर कट, जैसे सब कुछ एक वक़्त के लम्हें कर तरह मन में कैद हो ! जैसे सबने सचिन के साथ दो दशक को जिया है !

सचिन के खेल ने जीवन जीना सीखा दिया, अच्छी गेंदबाजी पर ५ गेंद रोककर अंतिम गेंद पर चौका, धैर्य और संयम ; जैसे हमें कहता जिंदगी के कठिन दौर में रुको समझो फिर आगे बढ़ो , बेबाक बल्लेबाजी हमें निडर बनने को कहता तो बार बार ये कहना की क्रिकेट को मैं रोज सीख रहा , अपने आप में सचिन को कितना बड़ा कद देता ; की हम जीवन में रोज कुछ न कुछ सीखें , हर दिन अवसर है चुनौती है सीखने की कुछ करने की ! सफलता के अम्बर के बीच एक इंसान जो सहज दीखता, दूसरों को प्रेरित करता, सचिन का जीवन हम सब के लिए आदर्श है !

सचिन के साथ वर्ल्ड्कप पुरे देश ने जीता ; बहुत ही मर्मस्पर्शी क्षण था वो और आँसू छलक आये जब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहा था ! सचिन पूरा देश आपकों प्यार करता है, आपने अपने देश का नाम गौरव से ऊँचा किया है ! #

एक कविता इस महान इंसान के लिएsachin god of cricket

कभी हँसे जो मेरी हसरतों पर ..
हमने उन्हें भी सलाम किया …
सब लोग कहते है मुझे खुदा सा ,
पर मेरी ये खता नही मेरे रब ..
तेरी ओर ये नजर रखी,
और बस मैंने तो सपनो को अंजाम दिया ! !

Happy Birthday Sachin 🙂 

hindi poetry on come back love

तुम बेवजह ही आ जाओ …

hindi poetry on come back loveमेरे पास वजह नहीं कोई,
तुम बेवजह ही आ जाओ,
आके खोलो फिर पोटली,
यादों की पोटली मैं भी खोलूँ,
तुम रूठना निकालों उससे,
मैं मनाने की कोई तरकीब,
तुम उदासी का चेहरा निकालों,
मैं हँसी वाला कोई किस्सा ।

मेरे पास वजह नहीं कोई,
तुम बेवजह ही आ जाओ,
तुम जो छोड़ के गए थे ख़ामोशी,
आके इसे फिर से बोलना सीखा दो,
लगता भूल गया है ये कुछ भी कहना,
शायद तुमसे कुछ कह भी ले,
मुझसे मुँह फिरा के ही बैठा रहता ।

अब कोई वजह नहीं आने की,
तुम बेवजह ही आ जाओ !

 

indian summer poem

निर्जन मन …


आजकल का मौसम, दिन भर जलती हुई पछिया हवा, निर्जन सड़के, चिलचिलाती धुप, बेजार मन ! एक कविता इसी संदर्भ में …

indian summer poemसड़कों पर रेगिस्तान उतर आया है,
पछिया बयार का तूफ़ान उतर आया है !

सूखे पत्तों से,
भर गई है गलियाँ और मुंडेरे,
धूलों का आसमान उतर आया है !

परदे आपस में उलझ गए है ऐसे,
जैसे किसी ने गाँठे बांध दी हो,
निर्जन राह और जलता आसमान,
तपती मौसम का पैगाम उतर आया है !

सुख गए है कूप और तालाब,
शुष्क धरा पर शैतान उतर आया है !

कैसे चुपचाप सी खामोश है दुपहरी,
उजड़े मन का कोई मेहमान उतर आया है !

#SK

sky as canvas thoughts

आसमान और कैनवास

sky as canvas thoughtsमेरे शहर के ऊपर,
रोज कोई कैनवास लगाता है,
रोज सोचता हूँ देखूँगा उसकी सूरत,
वो रोज कुछ न कुछ बना के चुपके से चला जाता,
बड़ी बड़ी रंगों की शीशी और बड़े बड़े ब्रशों को लाता होगा अपने साथ,
आखिर इतना बड़ा आसमां जो रंगता है वो,
कोई कहता है खुदा ईश्वर है वो,
मुझे तो मेरे जैसा कोई इंसान लगता है,
खुश हो के नीले रंगों में रंग देता,
कभी गम में काले भूरे गुस्से से तस्वीर बनाता,
कभी सोच में कहीं खो जाता होगा तो,
बिना रंगों में डुबोये ही ब्रश चलाता होगा,
मैंने कई दफा बिना रंगों के उजला आसमां देखा है,
पता नहीं सुबह शाम कभी गुस्से में रहता होगा वो,
अक्सर लाल रंग बिखरा देखता हूँ कैनवास पर,
नादानियाँ भी पकड़ी जाती उसकी,
सफ़ेद रुई के फाहों जैसे कभी हाथी, जिराफ, घोड़ा, ऊँट भी बनाता है बादलों में वो ।

मैं अक्सर सोचता हूँ,
मेरे शहर के ऊपर ये कैनवास कौन लगाता है ??

#Sujit

hindi poem on selfishness

खुदगर्ज़ ….

कितना खुदगर्ज़ दिन है
चुपचाप से रोज बीत जाता
न शाम से कुछ कहता,
और रात तो कबसे खामोश सी है ।

इन तीनों का कुछ झगड़ा सा है,
कोई किसी से नहीं मिलता,
बस उम्र गुजारने का हुनर सीखा है सबने,
कबसे ही अलग अलग जिये जा रहे ।

कुछ तुमने भी तो इनसे ही सीखा होगा,
या मैंने भी इनके जैसा जीना,
मैं दिन दिन तुम रात रात सी,
दो छोर हो जैसे,
कोई ढलता कोई उगता,
कोई शाम भी नहीं मिलाती इनको,
कितने खुदगर्ज़ हो गये है हमदोनों,
इस दिन रात की तरह ।

#SK