tv disease
My Voice Thoughts

आजादी २.०

ये कैसी आजादी की माँग है ; ये कौन लोग जो है समय समय पर भीड़ बनके आते है ; देश की आजादी का वर्तमान वर्शन जिसे पसंद नहीं ; मॉडिफाइड स्वराज और आजादी २.० की माँग कर रहे ! “अभिव्यक्ति की आज़ादी” को नई नई परिभाषा देने वाले लोग जो खुद इतना बोल जाते […]

Mahishasura
My Voice

महिशाषुर घोटाला …..

आम जनता को अपने त्रस्त जीवन में कब फुरसत है की महिशाषुर की जाति का पता करें और रावण के ननिहाल को खोजे, बस राजनेता सब काम छोड़ इसके पीछे पड़ते रहते ; संसद सत्र में करोड़ों रूपये की बर्बादी अब महिशाषुर की जाति और रक्तबीज का ब्लड ग्रुप पता करने में किया जायेगा ! […]

evening & sunset poetry
Poetry

शाम की व्याख्या …..

एक मित्र ने शाम की एक तस्वीर पर कुछ लिखने को कहा, कवि अनेकों नजरिये से परिभाषित कर सकता किसी चीज को, तो शाम की व्याख्या कुछ इस तरह … १. (कुछ शायरी के लहजे में ) एक मुक्कमल शाम की तलाश में, कितने बार डूबा है ये सूरज ! २. (प्रेम और विरह के […]

Untold Poem of Love
Poetry

प्रेम की अधूरी पड़ी कविता….

प्रेम के विस्तृत स्वरुप को कविता की शक्ल देना कितना मुश्किल है, प्रेम की अभिव्यक्ति जितनी भी शब्दों में की जाए वो अधूरी सी छुट जाती ; तो प्रेम को कवि कविता के रूप में प्रेषित क्यों नहीं कर पाता …… प्रेम संवाद सा था जब फासले कम थे, अब फासलों पर ये मौन अभिव्यक्ति […]

spring season
Poetry

वसंत की ताक में ….

जाती हुई ठण्ड, पछिया हवा के थपेड़े, किसी रूठी हुई प्रेमिका की तरह का दिन, दोपहर जैसे खामोश और चिरचिरा, न कुछ बोलता न कुछ सुनना ही चाहता ! वो दूर खेतों में मक्के मटरगस्ती करते, जैसे दूर से हमें चिढ़ाते हुए देखते, बिखरे बिखरे बालों पर जमी धुल, जैसे उजड़ा हुआ सा घर कोई […]