Monthly Archives: January 2016

ur becoming my habit day by day

तेरी आदत ….

ur becoming my habit day by day उसके आदत में शामिल हो ,
तुमने उसको वहीँ छोड़ा,
ऐसे हाल में उसको छोड़ा,
जैसे नशे की फ़िराक में,
तड़पता सा कोई सख्स ।

हाँ नशे की आदत थी,
दिन की हर बातों की,
पुर्जी बनाता था वो,
और रातों को तुम्हें सुनाता था ।

कभी हँसाता तुम्हें,
और थोडा खुद भी हँस लेता,
कभी मनाता तुम्हें,
और थोडा खुद भी रूठ जाता ।

अकुलाहट सी होती उसको,
किससे कहे सब किस्सा,
ये जो बातों का नशा था उसे,
अब शब्दों को दबाये रखना,
एक जलन सी सीने में,
और बैचैनी भी चेहरे पर ।

तेरी आदत ने बड़े अधर में छोड़ा,
नज्म न लिखता तो अबतक,
दम घुट गया होता उसका ।

#SK

ए मौत तू अब एक कविता नहीं …

मौत अब मौत नहीं सियासी उत्सव सा हो जाता,
बन जाता उल्लास और मौका सबके लिए ,
लम्बी लम्बी गाड़ियाँ रफ्तार से आती ,
उतरते है कुछ लोग जिनसे उसका कोई नाता नहीं,
न दोस्त है न दुश्मन ही न रिश्ते के कोई लगते,
फिर भी वो आते है सादे लिबास में !

बढ़ जाती है बिक्री फूलों और मोमबत्ती की,
वो आते है हाथों में भारी रकमों का चेक लिए,
थमाते है किसी की माँ की हाथों में वो कागज,
वो हाथें जो लाल और गीली है आंसूओं से,
फिर वो कहते है वही पुरानी सी रटी हुई पटकथा,
चीखों और रुदन को भर देती है भाषण की तालियाँ !

मौत तो वो नहीं जो बंधुकों और रस्सी ने दी,
मौत तो वो थी जब अख़बारों की लाखों प्रतियों में उसे,
छापे के मशीनों से गुजारा गया ;
मौत तो वो थी जब खबर के नाम पर,
खबर बोलने वाले हजारों गलों से चीखा गया ;
मौत तो वो थी जब विद्युत के कई तारों से गुजारकर;
लाखों चित्रपटों पर उसको दिखाया गया !

ए मौत तू अब एक कविता नहीं ,
तू खबर है जिसे चीखा जायेगा ,
तू नग्न बदन है जिसे नोंचा जायेगा ,
तू एक अवसर है जिसे लपका जायेगा ,
मरने के बाद भी रोज सुबह बेमौत तुझे,
वापस जिन्दा किया जायेगा !!

ए मौत तू अब एक कविता नहीं …

#SK

Photography By Sujit Kumar
Camera : Nikon P510
Location : Bhagalpur, Bihar (Near Bank of River Ganga)

mad world

पागल दुनिया ….

mad world

बस ओहदे बनने की होड़ में ;
हमने इंसान बनना छोड़ दिया ।

तू मैं और मैं तू के शोर में ;
हमने बातें सुनना छोड़ दिया ।

बस संदेशों की आवाजाही में ;
हमने मिलना जुलना छोड़ दिया ।

मिला खुदा नहीं जो पत्थर में ;
हमने दुआ माँगना छोड़ दिया ।

कुछ मोड़ आये जो इन रस्तों में ;
हमने चलना फिरना ही छोड़ दिया ।

मजहब थे बंधे हुए जिस डोर में ;
हमने उसके टुकड़े करके है छोड़ दिया ।

थोड़ी तल्खी थी आयी उसमें ;
हमने अपना कहना ही छोड़ दिया ।

बस ओहदे बनने की होड़ में ;
हमने इंसान बनना अब छोड़ दिया ।

#पागलदुनिया

A-R-Rahman-Gem-Of-Music-2013-500x500

“जय हो” रहमान ~ जन्मदिन मुबारक !

A-R-Rahman-Gem-Of-Music-2013-500x500चंदा को एक गीत बुलाती है कहती है – “चंदा रे चंदा रे कभी तो जमीं पर आ बैठेंगे बातें करेंगे”
इश्क़ को कभी चखा है ? “गुड से भी मीठा इश्क इश्क तो इमली से खट्टा इश्क इश्क है ” इस इश्क के बिना किया जीना यारों !
और दिल कभी टूटे तो ऐसा लगता “इस टूटे दिल की पीर सही न जाये” ! और इसी टूटे दिल से जब आह निकलती “दिल से रे ..” ;
मन मेरा जब सूफियाना हो जाता तब झूम के जाता “ख्वाजा मेरे ख्वाजा दिल में समा जा” … “पिया हाजी अली”
मेरी मिटटी जब मुझे बुलाती तो मन में गूँजता ” ये जो देश है तेरा, स्वदेश है तेरा” !
राधा कैसे न जले इसका भी कारण वो बताते है !

इश्क़ जैसे सजदा यार का और तब बस ये ही धुन निकलती ”
“वो यार है जो खुश्बू की तरह
जिसकी ज़ुबान उर्दू की तरह
मेरी शाम रात मेरी कायनात
वो यार मेरा सैंया सैंया ,
तावीज़ बनाके पहनूं उसे
आयात की तरह मिल जाए कहीं ”
और मेरा जिया जब जब जलता तब रात भर धुआँ उठता “जिया जले जां जले नैनो तले, रात भर धुआँ जले” !
सूखे से आँखों में मेघा को बरसाते “बरसों रे मेघा बरसों” !!

और सजनी को कहता ” तेरे बिना बेस्वादि बेस्वादि रतियाँ …. ओ हमदम बिन तेरे क्या है जीना” !
और मैं अपने धरती को नमन करता तो रोम रोम में ” माँ तुझे सलाम … वन्दे मातरम ” भर जाता !
कभी खुद से सवाल करता “रे कबीरा मान जा, रे फकीरा मान जा … कैसा तू है निर्मोही ? कैसी तेरी खुदगर्जी ? ”
अपने मितवा से पूछता “मेरे मन ये बता दे तूँ किस ओर चला है तूँ … मितवा कहे धड़कने तुझसे क्या ? ”
भटकते भटकते जब दूर कहीं निकल जाते तब उनको कोई बुलाता है “ओ नादान परिंदे घर आजा…..”
और फिर उड़ने को जी चाहता “मिटटी जैसे सपने कित्ता भी झारो फिर आ जाते है ..फिर से उड़ चला है तूँ” !

“जय हो” रहमान ! जिनके रग रग में संगीत बहता हो वो है रहमान !

जन्मदिन मुबारक !!