Yearly Archives: 2016

नया चाँद …

new moonबालों के गुच्छों में एक चाँद है,
जो कंधे पर सर रखके,
सुकून के तरीके तलाशता है,
सुबह सुबह घूँघट डाले आधे चेहरे तक,
बरामदे पर धीमे क़दमों से चलती है,
किसी कोने में खड़े हो देखा है,
उसे बड़े लहजे से चाय पीते हुए,
दो चार घूंट के बाद जब नजर उठती,
टकड़ा जाती है आँखें उसके चेहरे से,
वो रोक देती है कप को होठों तक,
जैसे किसी इजाजत के इन्तेजार में,
रुक गए हो हाथ उसके !

कभी कभी दोपहर में दोनों हाथों को,
बरामदे के रेलिंग पर रख कुछ सोचती है,
शायद नया आँगन कुछ अनजान सा लगता होगा,
किसी के आने की आहट सुन,
सकपकाते खींच लेना वापस घूँघट को,
सीख लिया है उसने रिवाजों को अपने लहजे में !

बस बाँहों की गिरफ्त ही नहीं आये उसके हिस्से,
कंगन बिंदी नये संवाद सबको ही अब चुन लिया उसने,
नये नये गगन में अब एक नया चाँद उग आया था !

#SK

Love Life & Things

कुछ दिन जब …

Love Life & Thingsकुछ दिन जब तुम नहीं बोलते,
कुछ दिनों की चुप्पी होती,
फिर बोलने लगती हर चीजें
तुम्हारी तरह ।

सुबह सुबह खिड़की के पर्दो से झाँकती है धुप,
तुम्हारी शक्ल लेकर,
कमरे की वो दीवार,
जिसपे बड़ा सा कैनवास लगाया था,
बदल के हो जाती है,
उसकी सारी तसवीरें तेरे चेहरे जैसी ।

कभी गुजरता हूँ आइने के सामने से तो,
कंधे के बगल में तेरी परछाई खड़ी नजर आती ।

कुछ दिनों की आँख मिचौली ठीक थी,
आओ फिर बातें करते हैं
सब चीजों को वापस कर दे शक्ल उसकी,
जो तुम्हारी तरह हो गयी थी ।

#SK

किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? #AutumnDays

Autumn marks the transition from summer into Winter ….. किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ?

Autumn Days Thoughts
ढलती रात अभी की, जैसे हवायें खुले खुले बदन से टकराकर अटखेली करती प्रेमिका सी लिपटती ; दूधिया रोशनी में नहायी सड़के और आसमां की खूबसूरती जैसे गुलज़ार की नज्म, उस नज्म से जैसे चाँद आसमां से उतरकर आपके बगल में आ बैठा ! जेठ की दोपहर के बाद जैसे रात का अहसास आज ही हुआ हो, उमस और तपिश के बाद पहली ओस की फुहार, किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

छत की मुंडेरों से घंटों देखना सड़क की ओर आते जाते अजनबी चेहरों में कुछ खोजने का कौतुहल, जैसे उसके चेहरे पर कुछ लिखा हो और असफल सी कोशिश उसे पढ़ने का ! आधी सी ठंड पर लिपटती आधी सी लिपटती चादर, जैसे चाहत हो कोई अधूरी सी ! कुछ रात ढलने पर पर उपजी सन्नाटों पर दूर कहीं निकल जाने का मन जैसे मन कुछ तलाशना चाहता हो !
किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

#Autumn #SK

गाड़ी – (#MicroPoetry)

ऊँची लम्बी गाड़ी,
खूब जोर का हॉर्न बजाती,
बगल में आके झटके से ब्रेक लगाती,
दिल धक् से रह जाता उस वृद्ध का,
अंदर गाड़ी से ठहाके की आवाज आती है ….

micropoetry

प्रेम …

Loveमैं उससे लड़ता हूँ,
की थोड़ी सी ख़ामोशी तो हो,
तुझे सोच सकूँ किसी नज्म की तरह,
और तुझसे कहूँ तू खूबसूरत है शब्दों सी !

अल्लहड़ जैसे हरदम बोलना,
जैसे हवा आयी हो खिड़की से
और मेज पर से सारे पर्चे उड़ा गयी !

हरदम जिद और जिरह की बातें,
जैसे कोई शरारती बच्चा हो,
माँ की हर बातें दुहरा रहा हो !

नकारना प्यार की बातें,
और हाथ छूने पर झिरक देना,
जैसे लाज से नहायी हुई स्त्री,
कुछ दूर जाके खड़ी हो गयी !

ऐसे कभी देखा नहीं तुम्हें संगीन होते,
हाँ कभी कभार पूछते हो प्रेम क्या है ?

#SK

old things poem hindi

कुछ पुराने सामान ….

old things poem hindiएक दिन मेरे दिये हुये
सब सामान पुराने हो जायेंगे,
टूट जायेंगे या अब नहीं रह जायेंगे,
वैसे की तुम साथ लेकर चलो इसे ।

किताबो की जिल्द उघड़ी होगी,
या काटा होगा चूहों ने कभी,
या हमारे रिश्तों की तरह,
वक़्त की दीमक ने खाया होगा इसे ।

वो तारीख बताता कैलेंडर,
जिसमें एक तरफ लगी होती फ़ोटो तुम्हारी,
क्या करते होगे उसका तुम बरस बीत जाने पर,
शायद फेंक देते होगे तुम,
हाँ कई सालों का इकट्ठा हुआ होगा,
मुझे तो आह निकलती,
मुझसे न फेंका जाता कभी ।

वो पुराना मोबाइल,
हाथ से छुट कर कई दफा गिरा होगा,
अब तो नहीं रखते होगे तुम साथ इसे,
बाजार में रोज दफा नया ही नया आता है,
उस समय भी वो नया सा था अपने हिसाब से ।

देखो न एक उम्र बीती है,
मैं भूल भी रहा कई चीजें,
बरसों हुए वो टेडी बियर तो मर गया होगा शायद,
पा गया होगा मुक्ति सब रिश्तों से,
मैं भी उसी तरह खड़ा हूँ,
सब पुराने सामानों की तरह,
दे दो मुक्ति सब बंधनों से,
की तेरे नाम सुनकर कोई स्मृतियाँ न आये,
तेरे चेहरे जैसी कोइ आकृति,
आँख बंद करने पर न बने,
पुराने हर सामान को जिस तरह तुमने छोड़ा,
वैसे ही दे दो मुक्ति हर रिश्तों से मुझे ।

#SK

night rain hindi poetry

पूरी रात ….

पूरी रात ही बरसी बारिश,
पूरी रात बूंदों का शोर था !

पूरी रात जो ख़ामोश रहा,
पूरी रात वो कोई और था !

पूरी रात रहा कोरा ही कागज़,
पूरी रात नज्म पर बूंदों का जोर था !

पूरी रात खिड़की के काँच पर फिसली बूंदे,
पूरी रात उसका चेहरा हर ओर था !

पूरी रात ही भींगी खाली सड़के,
पूरी रात सूना सूना हर मोड़ था !

पूरी रात ही बरसी बारिश …

#SK

new love hindi poem

इश्क़ ही है ..

new love hindi poem
वो जो रातों को अधजगा सा रखता,
अजनबी संग देखो सब भेद है कहता,
यूँ ही मन ही मन कुछ गुनगुनाता है रहता !

ये जो कुछ कुछ अपना सा लगने लगा है,
ये देखो कौन अब कुछ नया चुनने लगा है,
खुद से मन जो कुछ अब कहने लगा है !

हाथों की लकीरों का ये खेल सा लगता,
या बरसों का छुपा कुछ भेद सा लगता,
या रिश्तों की नई डोर का संयोग सा लगता !

वो जो रातों को जो अधजगा सा रखता,
शायद आधा अधूरा सा सही इश्क़ ही है !

#SK
Night Moon & You Hindi Poem

रात और चाँद …

ये कैसी शरारत करते हो,
रात तारों के साथ ऊँघने छोड़ जाते हो,
तेरे जाने के बाद एक तारा,
पास आ बैठता,
कन्धों पर हाथ रख,
पूछता है तुम्हारी कहानी,
मैं उससे झूठ कहता की,
तुम एक दिन आने को कह गए हो,
उसकी हँसी चिढ़ाती है मुझे,
जैसे उसने बात न मानी हो मेरी !

किसी रोज आके दो घड़ी,
पास तो बैठो,
हाँ रात घनी हो बिना बादलों वाली,
उस तारे को दिखाना है मुझे,
जड़ना है उसके मुँह में ताला,
उसको पता चले जमीं पर चाँद होता है ।

ये कैसी शरारत करते हो;
रात तारों के साथ ऊँघने छोड़ जाते हो !

#सुजीत