Monthly Archives: October 2015

conflicts of thoughts

तेरे नाम की बगावत में …

conflicts of thoughtsनफरतों में शामिल तुम हो नहीं सकते ;
मोहब्बत और नफरत के बीच किसी रस्ते पर,
तुम अब भी रहते हो !!

नदी के दो किनारे जैसे,
उचक उचक कर बस देखते,
बीच में लहरों ने कुछ ओझल सा कर रखा है !

मेरे अंदर का मैं,
मुझसे ही लड़ता है,
तेरे नाम की बगावत में,
घंटो उलझे रहते है दोनों !

एक नफरत की नुमाइंदगी करता,
एक उसे जी भर समझाता,
एक मन के अंदर दो मन,
बड़ी कश्मकश में जीते है दोनों !

#Sujit

ravan dahan - vijyadashmi

रावण जो तेरे अंदर बैठा है …

ravan dahan - vijyadashmi कागज़ों के रावण ही जलेंगे अब,
एक रावण मन में भी तो बैठा है !

द्वेष नफरत खिली चेहरे पर,
त्योहारों पर पहरा बैठा है !

सीख भजन की दब गयी कहीं,
यहाँ गला फाड़ सब बैठा है !

एक राम विजय का पर्व मनाते;
अब कई राम पराजित बैठा है !

मानवता को तू भूल रहा ;
ये कैसा हठ तू ले बैठा है !

जला सको तो जला लो तुम भी,
रावण जो तेरे अंदर बैठा है !

#Sujit …

writers pen

कलम है तो चेतना लिखें ….

writers penलेखकों के पुरस्कार लौटाने की परम्परा से असहमत हूँ ; आप समाज और सरकार से असंतुष्ट होने पर बस अपना पुरस्कार लौटा अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे ; आप समाज देश बदलने के लिए रचनायें लिखिए । लेखक है तो जन चेतना का कार्य कीजिये ! कलम को बस लिखने की जरुरत है ; आशा निराशा द्वेष असहमति सब इस कलम से व्यक्त कर सकते ! एक रचना इसी भाव से ..

कलम है तो चेतना लिखें ;
कभी विषाद और वेदना लिखें ।

प्रखर स्वर कर अपनी ;
कलम कभी अवहेलना लिखें ।

शोषण और क्षोभ पर उठ;
कलम अपनी संवेदना लिखें ।

मंद पड़ते उत्साह पर ;
कलम नई प्रेरणा लिखें ।

ठंड सी हो चली लहू में ;
कलम शौर्य की गर्जना लिखें ।

मृत है ये साज और श्रृंगार ;
कलम अमर है ऐसी कामना लिखें ।

#Sujit

Make in India Painting in Manjusha Art by Sujit

Manjusha Art – My New Initiative as a Folk Artist

जीवन में एक अवसर मिला अपने राज्य और क्षेत्र के सांस्कृतिक धरोहर को समझने का और उसके लिए कार्य करने का ; एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूँ अपने आस पास के कुछ महिलाओं को इस कला से जोड़ने की ; इस कला से जुडी कुछ बातें !

मंजूषा कला के बारें में ~

मंजूषा कला अंग प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है ! मंजूषा चित्र कला अंग क्षेत्र के लोकपर्व बिहुला-विषहरी पर आधारित है, ये एक पारम्परिक लोककला है जो पौराणिक समय से चली आ रही ! सिंधु घाटी सभ्यता के समय इस लोककला के विकसित होने के प्रमाण है ! मंजूषा कला को विश्व की प्रथम कथा आधारित चित्र कला माना जाता है ; मंजूषा कला में तीन रंगों का प्रयोग होता है ये है हरा गुलाबी और पीला ! इसे अंगिका चित्रकला भी कहते है जो आधुनिक समय में भागलपुर क्षेत्र के रूप में विख्यात है ! मंजूषा कला में बॉर्डर धार्मिक चिन्हों और x रूपी आकृति में पात्रों को दर्शाया जाता है ! साँप भी प्रमुखता से इस कला में उपयोग होता है !

मंजूषा कला से जुडी लोकगाथा –

कहते है की भगवान शिव एक बार चंपानगर के तालाब में स्नान करने आतें है और उसी समय उनके पाँच बाल टूटकर कमल पर गिरते जो पाँच कन्याओं का रूप ले लेती और ये कन्याएँ शिव जी की मानस पुत्री कहलायी ! इन पाँच कन्याओं को मनसा कहते है ; इन्होंने शिव जी से विनती की इन्हें संसार पूजे तो भगवान शिव ने कहा अगर चंपानगर का सौदागर चंदू जो मेरा भक्त है अगर वो तुम्हें पूजे तो संसार भी पूजने लगेगा ! मनसा चंदू सौदागर पर दवाब बनाती की वो उसे पूजे ; लेकिन ऐसा होता नहीं ! मनसा देवी को सर्प और मायावी शक्तियाँ थी ! मनसा देवी कुपित हो चंदू सौदागर को दंड देती उसके सारे पुत्रों को डश लेती और सभी पुत्रों की मृत्यु हो जाती ! फिर चंदू सौदागर को शिव जी वरदान से एक पुत्र मिलता जिसका नाम बाला था ; उसका विवाह बिहुला से होता ! शादी के पहले रात ही ; मनसा बाला को नाग से डसवा देती और उसकी भी मृत्यु हो जाती ! बिहुला को अपने पतिव्रता धर्म पर पूरा भरोषा होता और वो एक नाव में मंजूषा (एक साज सज्जा से भरी आकृति ) में अपने पति को ले नदी मार्ग से चल देती ; काफी बाधाओं से लड़ वो भगवान से अपने पति का जीवन वापस पाती ; और अंत में अपने ससुर चंदू सौदागर को भी मना लेती की वो मनसा की पूजा करें !

मंजूषा कला इसी गाथा का चित्र रूपांतरण है !

मंजूषा कला को संजोने के अनेकों कार्य हो रहे ; सरकार का प्रयास उदासीन ही अभी तक रहा है ; कलाकारों बिना उचित पारिश्रमिक के इस कला से नहीं जुड़े रह सकते, कला के व्यवसायिक उपयोग के संभावनाओं की तलाश करनी होगी ! इस कला के इंटरनेट प्रचार प्रसार में कुछ प्रयास कर रहा हूँ ! वेबसाइट और मोबाइल एप्प के माद्यम से इस कला को लोगों तक पहुँचाने का प्रारम्भिक प्रयास है मेरा ~

वेबसाइट – www.manjushakala.in
मंजूषा कथा चित्र  – 
http://manjushakala.in/manjusha-katha/
एंड्राइड एप्प – Manjusha Art on Google Play
फेसबुक – Manjusha Art on Facebook
यूट्यूब – View Videos of Manjusha Art on YouTube

कुछ मेरे द्वारा बनाई गयी मंजूषा चित्र – #Sujit 

Make in India Painting in Manjusha Art by Sujit

Make in India Painting in Manjusha Art by Sujit

Painting of God Sun in Manjusha Art by Sujit

Painting of God Sun in Manjusha Art

Champa Flower Painting in Manjusha Art

Champa Flower Painting in Manjusha Art

Shiv Ling Painting in Manjusha Art by Sujit

Shiv Ling Painting in Manjusha Art

Painting in Manjusha Art

Painting of Manjusha Art

Manjusha / Angika Art Painting

Manjusha / Angika Art Painting

– Sujit

रात चीखती धरी रह गयी

night-murder-poemभला उस गली में क्या खुदा बसेगा ;
जहाँ सब हाथ रंगे हो खूनों से !

मिट्टी भी रंगीन हो गयी ;
सबके काले करतूतों से !

जब रात चीखती धरी रह गयी ;
तब ख़ामोशी निकली कोनों से !

सना रक्त सा तेरा हाथ हुआ ;
अब इंसान गया तेरे सीने से !

साँसें किसकी छूटी तू क्या गिनता ;
तू मर गया अपनी सांसों को लेने से !

खुद की ही तूं लाश ढो रहा,
अब लतपथ हो पसीने से !

#Sujit (वर्तमान परिदृश्य से जुड़ी एक रचना )