conflicts of thoughts
Poetry

तेरे नाम की बगावत में …

नफरतों में शामिल तुम हो नहीं सकते ; मोहब्बत और नफरत के बीच किसी रस्ते पर, तुम अब भी रहते हो !! नदी के दो किनारे जैसे, उचक उचक कर बस देखते, बीच में लहरों ने कुछ ओझल सा कर रखा है ! मेरे अंदर का मैं, मुझसे ही लड़ता है, तेरे नाम की बगावत […]

ravan dahan - vijyadashmi
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रावण जो तेरे अंदर बैठा है …

कागज़ों के रावण ही जलेंगे अब, एक रावण मन में भी तो बैठा है ! द्वेष नफरत खिली चेहरे पर, त्योहारों पर पहरा बैठा है ! सीख भजन की दब गयी कहीं, यहाँ गला फाड़ सब बैठा है ! एक राम विजय का पर्व मनाते; अब कई राम पराजित बैठा है ! मानवता को तू […]

writers pen
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कलम है तो चेतना लिखें ….

लेखकों के पुरस्कार लौटाने की परम्परा से असहमत हूँ ; आप समाज और सरकार से असंतुष्ट होने पर बस अपना पुरस्कार लौटा अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे ; आप समाज देश बदलने के लिए रचनायें लिखिए । लेखक है तो जन चेतना का कार्य कीजिये ! कलम को बस लिखने की जरुरत है ; आशा […]

Make in India Painting in Manjusha Art by Sujit
Photography

Manjusha Art – My New Initiative as a Folk Artist

जीवन में एक अवसर मिला अपने राज्य और क्षेत्र के सांस्कृतिक धरोहर को समझने का और उसके लिए कार्य करने का ; एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूँ अपने आस पास के कुछ महिलाओं को इस कला से जोड़ने की ; इस कला से जुडी कुछ बातें ! मंजूषा कला के बारें में ~ […]

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रात चीखती धरी रह गयी

भला उस गली में क्या खुदा बसेगा ; जहाँ सब हाथ रंगे हो खूनों से ! मिट्टी भी रंगीन हो गयी ; सबके काले करतूतों से ! जब रात चीखती धरी रह गयी ; तब ख़ामोशी निकली कोनों से ! सना रक्त सा तेरा हाथ हुआ ; अब इंसान गया तेरे सीने से ! साँसें […]