Monthly Archives: September 2015

i-dream-of-a-digital-india

I Dream of a Digital India

डिजिटल इंडिया क्या एक नारा, स्लोगन, योजना या वादा मात्र है या फेसबुक पर अपने तस्वीर को तीन रंगों में रंग लेने का चलन या एक विरोध मात्र की हम फेसबुक के एक प्रोजेक्ट को वोट कर रहे ! ऐसे ही तमाम अटकलों उपक्रमों के बीच पनप रहा है भारत का डिजिटल ड्रीम ; आप चाहे या न चाहे माने या न माने इंटरनेट ने पिछले 10 साल में भारत के युवाओं को एक नई राह दी है एक नई सोच दी है ; उनके सोच को एक नई आजादी दी तो अभिव्यक्ति को नई उड़ान ! पर ये डिजिटल चंद लोगों तक या चंद शहरों तक ही न रह जाए इसके लिए एक सरकारी प्रयास है डिजिटल इंडिया ; क्या इंडिया को डिजिटल बनाना केवल सरकार का दायित्व है ; बिल्डिंग कपड़े कार मोबाइल सब हमें चाहिए ब्रांडेड अपनी पसंद का और देश स्मार्ट या डिजिटल नहीं चाहिए ? समाज या लोग क्या डिजिटल न हो ?

डिजिटल इंडिया हमारी जिम्मेदारी है – हम सब के छोटे से छोटे पहल से हम डिजिटल इंडिया में सहयोग कर सकते ; कैसे ?
१. अपने आस पास लोगों को खासकर बच्चों और युवाओं को समाज को डिजिटल होने के फायदे बतायें !
२. अपने घर में सभी लोगों को इंटरनेट और कंप्यूटर उपयोग करना सिखायें !
३. जिन लोगों तक कंप्यूटर और इंटरनेट की पहुँच नहीं है ऐसे कुछ लोगों की मदद के लिए आगे आयें उन्हें शिक्षित करने का प्रयास करें !
४. अपने गांव / शहर में अनेकों डिजिटल कार्यक्रम की चर्चा करें (मोबाइल, इंटरनेट, वेबसाइट, नेट बैंकिंग, किसान बीमा, किसान योजना आदि योजनाओं की चर्चा करें)
५. डिजिटल इंडिया के प्रचार में सरकार का सहयोग करें ; सुझाव दें, अपनी भागीदारी बनायें !
६. अपने कार्यों का डिजिटलीकरण करें, या दूसरों को सुझाव दें ! (जैसे वेबसाइट, ईमेल, सोशल मीडिया, क्लाउड स्टोरेज जैसे सुविधाओं का उपयोग)
७. डिजिटल मीडिया में कार्यरत मित्र ; लोगों को प्रेरित कर सकते डिजिटल उपयोगिता की ओर बढ़ने के लिए !

एक प्रसंग : कुछ दिन पूर्व एक परिचित जिन्होंने कभी इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल नहीं किया था ; उन्होंने पूछा की क्या कर सकते इससे नेट बैंकिंग से ; मैंने उनको बताया की अपने अकाउंट को आप इंटरनेट के माध्यम से उपयोग कर सकते थोड़ा कुछ उदाहरण के साथ बताना पड़ा जैसे आप अपने बच्चों को हर महीनें दूसरे शहर में पैसे भेजते ; बैंक से निकालते, दूसरे बैंक जाते जमा कराते आपका पूरा दिन बर्बाद ; आप नेट बैंकिंग से फण्ड ट्रांसफर तुरंत ही कर सकते ! बिजली बिल, टेलीफ़ोन बिल, मोबाइल रिचार्ज, बीमा प्रीमियम सब घर बैठे कर सकते ! बैंक खाते का विवरण, फिक्स्ड डिपाजिट, रेकरिंग जैसी सारी सुविधाएँ मौजूद है ! इंटरनेट के इस उपयोग से वो प्रभावित हुए ; इस तरह देखें तो इंटरनेट, तकनीक, कंप्यूटर की पहुँच को आम लोगों तक आने में और आम जीवन में सम्मिलित होने में एक लम्बा सफर तय करना है लेकिन हम लोगों के बीच इसके फायदे बता के इसको रफ़्तार दें सकते !

I Dream of a Digital India

I Dream of a Digital India

डिजिटल होने के कई मायने है कई फायदे है जैसे :-

१. ब्रिक & मोर्टार : विकास के सफर में सेवा, उद्योग, व्यवसाय ने काफी तरक्की की लेकिन भौतिक रूप से विद्यमान होने की एक सीमा है बढ़ती जनसंख्या का दवाब पुरानी तकनीक पर बोझ बनाता जा रहा है, परंपरागत पद्धत्ति की इस सीमा का हल है डिजिटल होना ! उदाहरण से समझे तो ” हर जिले में एक कार्यालय खोला गया म्युनिसिपैलिटी कर जमा करने के लिए, अब बढ़ते जनसंख्या से रोज भीड़ लम्बी लाइन, उपाय बिल्डिंग को बड़ा करना, विभाग का विस्तार लेकिन नए डिजिटल तकनीक से इसको इंटरनेट से जोड़ के उसी सिमित जगह से अनेकों लोगों को सेवा दी जा सकती !

२. ऑनलाइन उपलब्धता : कभी किसी चीज की जानकारी हम चाहते और वो ऑनलाइन नहीं मिलता, फिर उस विभाग की ओर लम्बी दौड़ ; इसके लिए आवश्यक है की सूचनाओं की उपलब्धता ऑनलाइन हो सब जरुरत के हिसाब से इसका उपयोग कर सकते ! मेरे डिजिटल मित्र इस शब्द को digital presence से बेहतर समझ पायें !

३. भौतिक संसाधन का बचाव – पुरानी पद्धति में नए नए भवन, भूमि और कई तरह के भौतिक संसाधन की जरुरत पड़ेगी, डिजिटल इन सब चीजों का बचाव करेगा ! अब आप एक छोटे से कार्य के लिए परिवहन का उपयोग करके हजारों लोग लाइन में खड़े होते इनसे भौतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होता ; डिजिटल माध्यम से इनका संरक्षण होगा !

४. समय – डिजिटल माध्यम हमारे समय का बचाव करेगा जिससे हमारी देश की रचनात्मकता बढ़ेगी !

५. भ्र्ष्टाचार पर अंकुश – डिजिटल माध्यम में देश के हर कार्यों का रूपांतरण ; भ्र्ष्टाचार को जड़ से खत्म कर देगा , लोग सजग बनेंगे जागरूकता आएगी !

६. रोजगारपरक – डिजिटल रूपांतरण के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर बनेंगे और पलायन किये बिना अपने शहर और गांंव में ही रोजगार का सृजन हो सकता !

७. रियल टाइम डेवलपमेंट – हमारी अर्थव्यस्था सुदृढ़ होगी वो भी रियल टाइम ; जैसे – किसान के उत्पादन का अगर आँकड़ा एक साथ रियल टाइम डिजिटल माध्यम से सरकार तक पहुँच जाए तो सरकार मूल्य वृद्धि और मांग पूर्ति के बीच तालमेल को बेहतर तरीके से नियोजित कर सकती !

चुनौतियां और प्रयास डिजिटल संरचना के लिए :-

१. इंटरनेट सुलभ, सर्वत्र हो ! उचित मूल्य पर इंटरनेट सुविधाओं का वितरण आवश्यक है !

२. डिजिटल शिक्षा – Digital literacy : डिजिटल शिक्षा की आवश्यकता बहुत है डिजिटल इंडिया बनाने में ; शिक्षा पाठ्यक्रम में इसका समावेश जरुरी है ! जो बच्चे अपने स्कूली शिक्षा से डिजिटल टेक्नोलॉजी के महत्व को समझेंगे, वो आगे चल अपने कार्यों में सफलतापूर्वक इसका व्यापक उपयोग भी करेगें !

३. Digital Awareness – लोगों तक डिजिटल माध्यमों का प्रचार प्रसार हो; जन जन तक इसकी अहमियत को जब तक नहीं समझाया जायेगा ; इसे थोप कर सफल नहीं बनाया जा सकता !

४. परम्परागत व्यस्था से तालमेल – हमारा देश अभी परम्परागत व्वयस्थाओं पर चल रही, त्वरित नयी तकनीक के समायोजन से वर्तमान कामकाज में अव्यवस्था उतपन्न हो सकती इसके लिए हर विभाग में पूर्व कार्यरत लोगों पहले निपुण करना और धीरे धीरे इस व्यवस्था को प्रतिस्थापित करना होगा ; नए दक्ष लोगों का समान रूप से समावेश से एक बेहतर तालमेल का निर्माण जरुरी है !

डिजिटल इंडिया को हम जिम्मेदारी के रूप में लें और अपनी भूमिका निभायें ; डिजिटल होने मात्र से सभी समस्याओं का हल नहीं हो जायेगा ! हमें डिजिटल माध्यम और डिजिटल संसाधनों का उपयोग संयम और सूझबूझ से करना होगा ! वर्तमान परदृश्य में हैश टैग वार में शामिल हो हम अपने देश के ऑनलाइन रेपुटेशन का मजाक उड़ा रहे ! विचारवान बने ; तर्कपूर्ण विश्लेषण और विरोध भी करें लेकिन मर्यादा की सीमा का स्वंय अवलोकन करें !

मैं डिजिटल इंडिया से आशान्वित हूँ ; देश को नया आयाम मिलेगा !

एक डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल के अपने विचार – सुजीत कुमार

If a writer falls in love with you, you can never die..

यू कैन नेवर डाय – Inbox Love 11

If a writer falls in love with you, you can never die..जब सब शांत स्तब्ध और अकेला सा हो जाता तो यादों का बादल तैरने लगता मन के खुले आसमानों में ; यादें भी तो कभी दम तोड़ देती होगी किसी के मन में कितना याद रख पायेगा कोई जिंदगी के अनेकों उधेड़बुनों में ! पर तुम नहीं मरोगे कभी … उसने बड़े सहज ढंग से कह दिया !

 
क्यों ? क्यों नहीं सब एक दिन खत्म हो जाता, बातें .. यादें .. जहन से चेहरा भी मिट जाता है !
नहीं कुछ चीजें नहीं मिट सकती ; तुम नहीं मिट सकते मेरे मन से ; उसने विरोध में कहा !

याद है एक दिन तुमने क्या कहा था … ” इफ ए राइटर फाल्स इन लव विथ यू, यू कैन नेवर डाय ”

हम्म .. इससे से आगे कुछ लिखा नहीं तुमने !

बस तुमने कुछ लिखा नहीं और मैंने कभी लिखना बंद किया नहीं ; मैं नहीं मरने दूँगा किसी स्मृतियों को, किसी बातों को, हाँ शक्ल उम्र दर उम्र ढलेगी लेकिन वो जो शब्दों में तुम्हें दर्ज करके रखते जा रहा हूँ , वो हमेशा नया है बदलते मौसमों की तरह ; सावन की बरसात की तरह, उफनती नदी की तरह, पेड़ के नए पत्ते की तरह, डूबते चाँद और रोज उगते सूरज की तरह !

मेरे शब्दों में रोज तुम सुबह गमले को सींचते, पक्षियों को दाना देते हो, आँगन में पायल की रुनझुन तो गलियों में कदमों की आहट से हो गए हो !

तुम्हें मैंने शब्दों के हर साँचे में ढाल दिया है, एक कैनवास जिसपर बनी तस्वीर से मौन बातें की जा सकती है !

बताओ क्या ये शब्द मरने देंगे तुम्हें ; तुम्हें नये नये रूप में, नये नये ढंग से ये शब्द रोज नयी जिंदगी देंगे ! तुम कभी नहीं मरोगे ; एक अमर कविता में परिणत हो चुके हो तुम !

तुमने बस कह के भुला दिया लेकिन मैं समझ गया था “If a writer falls in love with you, you can never die.. ” !!

#SK in Inbox Love …

suicide hindi poem

ख़ुदकुशी

एक हतप्रभ करने वाला खबर था, किसी पिता को बुखार में तपते बच्चे को हाथ में लिए बड़े बड़े अस्पताल से लौटा दिया जाता, बच्चे की मौत माँ बाप के जीने की उम्मीदों को तोड़ देती और वो खुदखुशी कर लेते ! ये एक शहर की खबर मात्र बन गुम हो सकती लेकिन मानवता के लिए कलंक, की हम ऊँची ऊँची अट्टालिकाओं और विलासिता की होड़ में कैसी दुनिया बनाना चाहते ?

इसी संदर्भ पर कुछ महसूस हुआ .. एक कविता

ख़ुदकुशी

suicide hindi poemखुद की ख़ुशी जब छीन गयी,
अब कुछ भी इस जहाँ में नहीं था,
तो बस अब क्या करता,
कर ली ख़ुदकुशी !

इबादत भी की हमने,
सजदे में भी झुका,
मिन्नतें भी खूब की,
दुआ और दवा भी,
अब क्या करता मैं,
कर ली ख़ुदकुशी !

भागा भागा में पहुँचा वहाँ,
जो आसरा था मेरा,
सुना था सब कहते थे,
भगवान का दूसरा बसेरा,
उम्मीद भरी नजर से देखा,
आंसुओं को रोक कर देखा,
हाथों में तप रहा था वो मेरे,
मैं भी तो जल ही रहा था,
लौटा दिया गया मैं वहाँ से,
अब क्या करता मैं,
कर ली ख़ुदकुशी !

दम तोड़ चूका था वो,
मेरे आँखों में ही सो गया था वो,
अब फरियाद को लब्ज नहीं,
न ही किसी सिफारिश की जरुरत,
न अब किसी से गुजारिश ही करनी,
हो सके तो किसी को फिर न लौटाना,
जो था बिखर ही गया,
हिम्मत नहीं जुटा सका सहेजने की,
मैं अब क्या करता,
बस कर ली ख़ुदकुशी !

#Sujit

 

Awarded in StoryMirror Short Stories Contest Season 1

लेखन स्वंय एक पुरस्कार है ! आपके शब्द जब लोगों तक पहुँच कर उनके मन को प्रेरित करें और आपकी रचना से वो जुड़ जाएँ तो आपके लेखन का वास्तविक प्रयोजन सफल हो जाता ! कुछ वर्ष पूर्व मेरी एक रचना “एक गुड़िया परायी होती है” को काफी लोगों से सराहना मिली थी और अब StoryMirror के लेखन प्रतियोगिता में इसे तृतीय स्थान मिला !

Award in Story Contest

 

मेरी कविता इस प्रतियोगिता में सम्मिलित थी …

एक गुड़िया परायी होती है – 1

एक गुड़िया परायी -२

11988351_1470107346651794_6440623632906505034_n
Storymirror के पूरी टीम का यह सामूहिक प्रयास बहुत ही सराहनीय है ; अनेकों लेखकों, रचनाकारों, कवियों को ये पहचान दिलाने में एक अहम भूमिका निभायेगा ! स्टोरी मिरर से Akansha Yadav को शुक्रिया ; प्रेरित करने के लिए की मैं इस प्रतियोगिता में अपनी सहभागिता दूँ !!

Storymirror.com पर  आप सभी लेखक एवं चित्रकार इस मंच से जुड़ के अपने कला को नया आयाम दे सकते !

 

set free your words

लब्जों को ढील दो ….

set free your wordsथोड़ा लब्जों को ढील दो ;
आके मुझसे वो बातें कर ले ;
तेरे कहने पर ही वो आयेंगे ;
जाने तुम आँखें दिखाते होगे;
किसी पराये के तरह वो रहते है ;
सामने बस घंटों देखा करता,
न बोलते न सुनते वो कुछ,
लब्जों को भी तुमने सीखा दिया,
जाने कैसे अपना सा बना दिया तुमने,
सूखे से कंठों से होठों से,
कोई स्वर ही नहीं फूटा है,
फिर दो लब्ज लौटते तो,
मैं कुछ तो बातें करता उनसे,
कह देता मैं वो सब कुछ,
जो दफ़्न सा है एक राज की तरह,
टूट ही जाती लम्बी सी ख़ामोशी,
जो तुम थोड़ा लब्जों को ढील देते !

Poetry : Sujit Kumar

Insane Poet - Sujit Kumar

 
 

dream die

रोजमर्रा ….

NDTV के एक रिपोर्ट से प्रेरित ~

रोज एक जैसी रोजमर्रा की जिंदगी, वही वक़्त से पहुँचने की रोज फ़िक्र तो वापस समय पर आने की कोशिश ! एक पाश में जकड़ा समय का पहिया, बस एक नियत कार्यों और गतिविधयों की लम्बी सुरंग जो जिंदगी के अंतिम मुहाने तक जाती ; उस ओर जब निकलते कुछ इन्तेजार करता “कुछ सवाल, कुछ लोग, कुछ व्यतीत जीवन, कुछ स्मृतियाँ, कुछ सफलतायें, कुछ विफलताएँ ! ये सलाह आसान भी नहीं और वास्तविक भी नहीं क्योंकि हम सब उसी पाश का हिस्सा है, इसी खींचा तान में बढ़ते जा रहे ! हाँ इन्हीं जटिलताओं के बीच जो कुछ करने का जोखिम उठाते वो इतिहास बनाते … विचारों के बवंडर में घिरना और खुद को स्थिर रख पाना जीवन जीने की एक कला ही है ! और हम जिंदगी के कलाकार, ऐसे सपनों और ख्वाहिशों का क्या ; “हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले” जिंदगी के सफरनामे को इन कुछ पंक्तियों के माध्यम से जीवन को देखिये तो अपने अंदर सोच और नजरिये में बदलाव को महसूस कर सकते !

पाश की एक कविता है :-
** — ——
बैठे बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
सहमी सी चुप्पी में जकड़े जाना बुरा तो है
पर सबसे ख़तरनाक नहीं होती

सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
ना होना तड़प का
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक वो आँखें होती है
जो सब कुछ देखती हुई भी जमी बर्फ होती है..
जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्बत से चूमना भूल जाती है
जो चीज़ों से उठती अन्धेपन कि भाप पर ढुलक जाती है
जो रोज़मर्रा के क्रम को पीती हुई
एक लक्ष्यहीन दुहराव के उलटफेर में खो जाती है
सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है
जिसमे आत्मा का सूरज डूब जाए
और उसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके ज़िस्म के पूरब में चुभ जाए !
** — ———–

Thoughts :

Insane Poet - Sujit Kumar