rain poem
Poetry

बारिश …

प्रकृति को महसूस करें तो कितने ही जीवन रंग इसमें छुपे है ; मानसून की बारिश रोज ही रुक रुक के होती, एक लम्बी उमस के दिनों के बाद जब बारिश की फुहार मन को तर करती, खिड़कियों से घंटों बारिश से भीगे सड़कों, पेड़ पौधों, पक्षी, घर घरोंदा आँगन सब को देखते देखते कितने […]

stubborn life
Poetry

जिद ….

जिद मैंने भी और तुमने भी कर ली ; रुठने के कोई बहाने नहीं थे ; थी तो एक जिद; तुम्हारे पास भी और हमारे पास ! मैंने जिद की पोटरी पर दो गाँठे डाली; मुझे इसे बहुत दूर ले जाना था ; तुमने जिद को अपनी जिद में छुपा लिया ; और वहीँ छोड़ […]

Life in a small city
Random Thoughts Thoughts

कुछ तो लोग कहेंगे …

कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना बाबू मोशाय सादे कुर्ते पैजामे में गलियों से जाते हुए ; और लोग उन्हें देखकर बातें बनाते हुए ! कहीं न कहीं अभी भी हमारा समाज ऐसे ही दकियानूसी मानसिकता से घिरा है ; लोग हमेशा अपने आस पास के लोगों में ज्यादा दिलचस्पी रखते, समाज […]

Hindi poem on Moon
Poetry

चाँद और तुम …..

एक आदत सी इधर से डाली है, रोज ऊपरी मंजिल पर आ मैं, पेड़ की झुरमुटों में चाँद देखा करता, एक दिन पूरा था तुम्हारी तरह, हजारों सितारों के बीच अलग सा, वैसी ही उजली सी नहायी हुई, लपेटे हया का चादर चारों तरफ, झाँकते हुए बादलों की ओट से ! कुछ दिनों से वो […]

migration
Random Thoughts Thoughts

महानगर की ओर …

दुरी है या खाई है फर्क मालूम ही नहीं पड़ता ; गिने चुने महानगर तक सिमट कर रह गया है देश ;  खबरें वहीँ की वहीँ बनती है वहीँ संवरती ! ये पलायन का किस्सा कबसे चला आ रहा और चलता ही जा रहा जैसे बंधुआ मजदुर हो ; रुकता  ही नहीं ! छोटे कस्बों […]