Monthly Archives: May 2015

मंदिर की घण्टियाँ …..

बचपन में इस मंदिर में आके हाथों को ऊपर करके इसे छूने का प्रयत्न करते थे ; तभी पीछे से कोई आके गोद में उठा के हाथों को पहुँचा देता ; कुछ बरसों के बाद दुर से दौड़ के आते ही थोड़ा कूदने पर हाथों को ये घंटियाँ छु जाती थी । बरसों बाद अब भी उसी ऊँचाई पर ये घंटियाँ झूलती है ; आज भी किसी बच्चे को उसके पिता गोद में उठाते और कोई बच्चा दूर से आके हाथों से छुने का प्रयत्न करता । अब मैं थोड़ा सर झुका के नीचे से जाता हूँ ।

11374668_1608867106065483_1257773352_nएक कविता इन्हीं यादों से ….

मंदिर की घण्टियाँ गुच्छे में ;
वर्षों से झूलती हुई प्रांगण में !

बहुत यत्न बहुत प्रयत्न पर ;
हाथ ना वहाँ तक जा पाता !

फिर पीछे से कोई था आता ;
गोद में ऊपर हाथों को ले जाता !

कुछ बरसों का था कौतुहल ;
सोमवार को होती थी हलचल !

अब दूर से एक लम्बी दौड़ लगाता ;
थोड़ा उछल कर हाथों से छु जाता !

अब भी वही तो होता है ;
कोई आके गोद उठाता है !

कोई फिर लम्बी दौड़ लगाता है ;
अपने हाथों से उन गुच्छों को छु जाता !

मैं पास खड़ा खोया थोड़ा ;
मेरा बचपन फिर मुस्काता !

अब सर को झुका के थोड़ा सा ;
खुद ही हाथों से मैं छू के कदम बढ़ाता !

कितनी कलरव सी धुन होती है इनमें ;
मंदिर की घंटियों से बचपन याद है आता !

#Sujit (Memoirs of Home Town)

warrior of light book review

Book Review – Manual of The Warrior of Light

Manual of The Warrior of Light

I know Paulo Coelho as writer of “The Alchemist”; after reading this book I really became fond of Paulo Coelho writing and their inspirational scripts. In first look “Manual of The Warrior of Light” recall the storyline of Alchemist. The cover page theme a boy in-between birds, sky, river excites and raise some secrets but when I had went through its pages I found another masterpiece of Paulo Coelho Writing. This book is complete inspiration booster for everyone.

Book – Manual of The Warrior of Light

Author : पाउलो कोएल्हो (Paulo Coelho is a Brazilian novelist and songwriter.)

क्या है इस किताब में –

ये किताब बताता आप हम सभी प्रकाश के योद्धा है मतलब हर इंसान जो बुराई से लड़ रहा ; अपने मंजिल को पाना चाहता वो एक योद्धा है और प्रकाश सफलता का सूचक है ; अच्छाई का सूचक है ! एक योद्धा क्या सोचता ; कैसे जीतता ; कैसे अपने आपको तैयार करता युद्ध के लिए ! ये कोई कहानी नहीं है ; इसमें हर पृष्ठ पर एक सन्देश है जो आपको कुशल योद्धा बनने के लिए प्रेरित करता !

क्यों पढ़े
१. पाउलो कोएल्हो की किताबों को पसंद करते
२. जिंदगी को एक नई दिशा देना चाहते
३. उलझनों से लड़ने की हिम्मत पाना चाहते
४. इस दुनिया में अपने आप को योद्धा समझते है तो जरूर पढ़े
५. अपने अंदर नए उत्साह का संचार करना चाहते

किताब से

Paulo Coelho

# A Warrior knows that a great dream is made up of many different things, just as the light from the sun is the sum of its millions of rays.

# A Warrior does not go into battle without knowing the limitations of his ally.

# In order to have faith in his own path, he does not need to prove that someone else’s path is wrong.


# Warriors of light are not perfect.Their beauty lies in accepting this fact and still desiring to grow and to learn.
#A warrior does not spend his days trying to play the role that others have chosen for him.# A warrior cannot lower his head – otherwise he loses sight of the horizon of his dreams.

# A warrior of the light never picks fruit before it is ripe.

# एक योद्धा को जब एक ही कार्य अनेकों बार करने होते है तो वो अपने कार्य को पूजा समझ के करने लगता है !

# कभी कभी प्रकाश का योद्धा समझता की वो दो जिंदगी एक साथ जी रहा है !

# प्रकाश का योद्धा अपनी कमियों को जानता है लेकिन वो अपनी गुणों से भी वाकिफ होता !

# प्रकाश का योद्धा को कभी उनसे भी लड़ना पड़ जाता जिनसे वो प्यार करता है !

# प्रकाश का योद्धा हमेशा सीखने के अवसर को तलाशता !

warrior of light book review

~ Sujit in Book Review of  “Manual of the warrior of Light” .. यहाँ से खरीदे इस किताब को …

words of painting

एक चित्र से वार्तालाप …

अब पूरी तरह नहीं ढाला जा सकता शक्ल में ; मन के किसी कोने में अब किसी तस्वीर का धुंधला सा प्रतिविम्ब है जिसने उँगलियों को जैसे बरबस पकड़ के चलाया हो । कुछ उभरी कुछ आकृति कोई चेहरा कौन हो तुम मेरे शब्दों की छुपी कल्पना सी मेल खाती है लेकिन वो तुम नहीं हो । तुम एक अनुतरित्त प्रश्न हो ; बेशक्ल ; बेजुबान बेमन से खींची गयी आकृति ! तुम्हें शब्दों की शक्ल नहीं दी जा सकती ; तुम्हें स्वर से सजाया नहीं जा सकता । तुम श्यामपट्ट पर फैली ख़ामोशी मात्र हो जिससे संवाद का प्रयत्न व्यर्थ है !

एक चित्र से वार्तालाप 

ब्लैक कैनवास पर तुम्हारा चेहरा,
उकेरना इतना आसान भी नहीं था,
कोई एक तस्वीर ठहरती मन में तो,
झट से कागज़ पर उतार देता,
कई आती जाती स्मृतियाँ थी,
कोई मुक्कमल सा चेहरा उभरा नहीं,
मैं सोचता जब संजीदगी भरी आँखे,
हँसी वाली एक तस्वीर सामने से हो आती,
सोचा था तेरे गुस्से का कुछ रंग लूँगा,
मासूमियत की कई तस्वीर सामने आ गयी,
आखिर कई पुरानी तस्वीरों और चेहरों को सोचा,
बस एक आकृति सी उकेर पाया,
अब तुम हो या मेरी कल्पना कुछ फर्क नहीं जान पड़ता,
झुल्फों का एक गुच्छा उलझ गया था,
मैंने ब्रश को रंगों में डुबो के उसे सुलझाया,
एक लट को यूँ चेहरों पर लेके थोड़ा घुमा सा दिया,
अब कुछ कुछ तुमसे मिलती है तस्वीर मेरे ख्यालों की !!

words of painting

Sujit – In Night & Pen

vacant way of life

निर्वात पथ पर ….

vacant way of lifeनिर्वात पथ पर अब संवाद नहीं ;
व्यर्थ वक़्त का तिरस्कार नहीं !

शून्य सफर पर अब श्रृंगार ही क्या ?
विचलित पथ का उपहास ही क्या ?

मौन पड़े इस प्राँगण में ;
कुछ खींचनी फिर रंगोली है !

शाम होती गोधूलि पर ;
रात फिर नई नवेली है !

मंजिल की तैयारी पर ;
पीछे छूटी हवेली है !

हर संशय का है सार यही ;
अगर चलता है तो हार नहीं !

#Sujit

A Thank You Note !!

कार्यस्थल भी एक परिवार है ! हम अपने जिंदगी में कितना वक़्त कार्यस्थल पर व्यतीत करते ; मेट्रो शहर में एक ही तो धुन होती सुबह उठ के कार्यस्थल की ओर ; पूरा दिन ; दोपहर ढलती शाम और घिरती रात तक अपना जीवन व्यतीत करते ; कार्यस्थल जीवन का अभिन्न अंग बन जाता इसे कैसे नकारा जा सकता ! कार्यस्थल के साथी जीवन से जुड़ते ; जीवन की हर बात साझा करते ; हँसते मनाते जीवन यहाँ बीतता कुछ मेट्रोनमा के साथ बनते कुछ अंतरंग मित्र !

आज जीवन के एक पड़ाव पर कार्यस्थल से विदाई का भावुक क्षण था ; यहाँ आप अपने केवल प्रतिभा और काम के लिए ही नहीं जाने जाते ; अन्य साथी के साथ आपका बर्ताव और सहयोग की भावना भी आपको सबसे जोड़ती ! दूसरों को प्रोत्साहित करना ; उनको अपने जीवन की दिशा चुनने में मदद करना भी एक जिम्मेदारी है ! सभी मित्रों के विदाई संदेश ने मन में ख़ुशी दी की ; शायद मैं उनके जीवन में कुछ अमिट हिस्से छोड़ने में कामयाब रहा !

कार्यस्थल जीवन के निरंतर प्रवाह का सूचक है ; रोज नई जिम्मेदारियाँ के निर्वाह के लिए खुद को तैयार करना ; अपने ज्ञान को निरंतर विकसित करने के लिए प्रयत्न करना और चुनौतियों के समक्ष खुद के सामर्थ्य को साबित करना ! यहाँ प्रयत्न भी है ; कभी निराशा भी है ; कभी आशा भी है ; कभी संवाद भी है ; कभी विवाद भी है ; कभी प्रतिस्पर्धा है तो कभी समझौता भी है ! ये इस जगह की खूबसूरती है ; जिंदगी के महत्वपूर्ण हिस्से का रंगमंच जहाँ हम बेहतर इंसान बनते ; सीखते, समझते !

जीवन के इस पथ पर नये आयाम जुड़ते ; आज इसी नये आयाम के क्रम में अपने वर्तमान कार्यस्थल से किसी नये दिशा में अग्रसर होने के पूर्व मन में मिश्रित भाव थे ; कई यादें थी ; कुछ किस्से थे कुछ बातें थी ; कुछ साथी थे जो पीछे छूट रहे थे ! आने वाले कल के प्रश्न थे मन में संशय था लेकिन आपलोगों के संदेशों ने मन में ऊर्जा दी है की जीवन में बेहतर और कुछ नया करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ और रहूँगा ! भले कार्यस्थल एक ना हो लेकिन मन में संबंध बने रहेंगे !

आप सभी के स्नेह के लिए धन्यवाद ! Grapes Digital में काम करना एक अनूठा अनुभव रहा ; मन में कई स्मृतियाँ यहाँ की जीवन पर्यन्त बनी रहेगी ! सभी साथी को उनके सुनहरे भविष्य की शुभकामनायें !

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जो बिखरने का हुनर तुम्हें मालूम है दोस्त ;
एक दिन तू जरूर बनाएगा बुलंदी की इमारतें कई !!
#SK

#सुजीत