Monthly Archives: April 2015

eastern wind bihar poem

ये पुरवा हवा..

eastern wind bihar poemये पुरवा हवा..

काश इसे कैनवास पर उतारा जा सकता;
शब्दों में बांधा जा सकता;
या किसी संगीत में इसे समाया जा सकता;
अपने संवेग से अल्हड़ बन ये बहता ;
छत की मुंडेरों से टकराकर इठलाता ;
चिड़ियों के संग संग उड़ता जाता ;
पेड़ों के संग बाहें डाल झूल जाता ;
नदी के तीर पर बहता बलखाता ;
गेहूँ की सुखी बालियों को छूता सहलाता ;
गलियों में आवारा बन धूल उड़ाता ;
अहसास बन कर ये मन को है तर कर जाता !

#Sujit

 

indian farmer life

प्राइम टाइम – खेत खलिहान से (व्यंग्य)

खेती व्यवसाय नहीं है ; कैसे होगा मिट्टी वाला पैर से उ लक्ज़री पॉलिश वाला मार्बल खराब नहीं हो जायेगा !
” भारत एक कृषि प्रधान देश है ” ; निबंध का पहला लाइन पहले भी आज भी ; परीक्षा में भी नंबर दिलाता किसान ; भारत एक कृषि प्रधान देश है; भाषण का पहला लाइन .. राजनीति में अव्वल बनाता किसान !! किसान बिज़नेसमैन बन गया तो मुआवजा नहीं लेगा उल्टा चंदा देगा !

चलते है किसान रैली की तैयारी की तरफ …

दस गो गहुम का गाछ उखाड़ के लेते आये ; अरे का करियेगा ऐसे ही अबकी गहुम नहीं हुआ है ; अरे इ गहुम गाछ बहुत काम का है इसको हाथ में लेके फोटो जो खिचाना है ; मुआवजा काल में खेती टाइप का कुछ गेटप बनाना पड़ता है !! इ थीम है सब को हाथ में गहुम मकई का गाछ लेके सुबह सुबह आना है ; हाँ कुरता पैजामा में थोड़ा धुरदा लगा लीजियेगा लगेगा जैसे डायरेक्ट खेत से संसद पहुँच गये है !!

और सर का करना है ; अरे ४-५ को लकड़ी का हल बना लेके लेते आएगा ; हल का का करेंेगे खेती सहिये में करियेगा का ; अरे नहीं हल नहीं लाना है मॉडल चाहिए हल का उ स्टेज पर खेती समारोह मनाना है न !!

एकाएक किसान प्यार देश में बढ़ गया है .. आपको नहीं हो रहा तो उपकार सिनेमा का गाना सुनिए “मेरे देश की धरती ; बैलों के गले में जब घुँघरु जीवन का राग सुनाते है” !! चलिये अब नेट न्यूट्रल है ही फेसबुक ट्वीट करते रहिये …..

indian farmer life

{आज प्राइम टाइम खेत खलिहान से }

Just For Humor – Sujit

Life Stopped Poetry

थम गये हैं ..

Life Stopped Poetryथम गये हैं हम और तुम भी ;
नहीं थमा ये वक़्त का पहिया ;
चलता रहा दुर जाता रहा ;
अब सफर के दो दिशाओं में ;
मुमकिन न होगा मिलना !

पैगामों की आवाजाही भी बंद है,
न ही अब खतों के पुर्जे उड़ा करते,
हवायें मतवाली सी हो उठती तो,
खिड़की की छड़ों पर जा बैठती,
पाती तेरे नामों वाली ;
थोड़ी फरफराहट कर जैसे
लबों से नाम कह जाये तुम्हारा,
मैं झट से पकड़ लेता,
मोड़ कर तकिये की नीचे रख देता,
रात में फिर पढूँगा पुराने खतों को,
नया लब्ज देके मैं ।

एक हाथ दे दो,
खींच लो इस वक़्त से हमें,
बस थम गये हैं हम और तुम भी !

– Sujit

Hindi Poem afternoon

दोपहर

दोपहर पर कितना कुछ है लिखने के लिये ~ कुछ मित्रों ने कहा ये दोपहर इतना उपेक्षित क्यों ; तो एक कविता “दोपहर” पर कोशिश करिये ; एक दोपहर , शहर, स्त्री, एक गली, एक बेरोजगार, रोज दफ्तर जाता एक कामकाजी आदमी, एक पुराने घर में पुराना पंखा, क्या क्या कहता है ; कल्पना और शब्दों के गोते !

Hindi Poem afternoon

ये खाली दोपहर उबासी लिए आँखें,
जैसे सूना ससुराल ऊबती हुई स्त्री ;
दीवारों को घूरते ताकते ऊँघते ;
किसी किसी दिन घंटो नींद नहीं आती !

पुराना पंखा भी कैसी आवाजें करता ,
कुछ कुछ कहता रहता है वो भी,
गला बैठा है उसका ना जाने कब से,
कितनी दफा बोला है दिखा लाओ !

गली सुनसान सी हो जाती इस शहर की,
कभी कोई फेरीवाला आवाज लगा देता,
किसी किसी घर की सीढ़ियों पर,
जमा हो जाती है पुरानी औरतें ,
नई बहु से सबको ही शिकायतें है !

नींद में ही कुछ कुछ देर में ;
उसके पीठ पर हाथ फिरा देती माँ,
बच्चा छोटा है रोके फिर सो जाता है !

कल ही दोपहर की धुप झेली थी;
रोज रोज की तलाश भी तो अच्छी नहीं लगती ;
कुछ सिफारिशों का इंतेजाम किया है ;
इस धुप में डिग्री की कागज़ ना जल जाये !

कैंटीन से निकल कर दोपहर में देखता,
आस पास के बच्चे कुछ खेल खेलते है,
वापस दफ्तर की सीढियाँ चढ़ते हुऐ सोचता,
कई बरसों से मैंने भी तो सुकून का दोपहर नहीं देखा !

#Sujit

Mr and Mrs 55 ( B&W Era ) सिनेमास्कोप से !

Mr and Mrs 55

ब्लैक एंड वाइट सिनेमा के दौर से गुरुदत्त की एक ऐसी ही सिनेमा से रूबरू कराते है आपको ! – Mr and Mrs 55

Cast: Madhubala, Guru Dutt, Lalita Pawar, Johnny Walker, Vinita Bhatt (Yasmin), Kumkum, Tun Tun, Cuckoo

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एक साधारण सी प्रेम कहानी १९५५ में ये सिनेमा आई थी ; गुरुदत्त और मधुबाला मुख्य किरदार में थे ! कहानी कुछ इस तरह थी – गुरुदत्त (प्रीतम) एक कार्टूनिस्ट लेकिन बेरोजगार दोस्त से उधार पर नौकरी की तलाश कर रहा बंबई में ; सीता देवी शहर की जानी मानी हस्ती जो महिला संगठन से जुड़ी थी ; सीता देवी पुरुषों के खिलाफ महिलाओं को एकत्रित करती और भारत में तलाक प्रथा के लिए कोर्ट में महिलाओं की अर्जी का समर्थन कर रही थी !

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अनीता सीता देवी की भतीजी – बड़े घर में पली लड़की ; प्यार के तलाश में मस्त मौला सी रहने वाली ; अनीता के किरदार में थी मधुबाला ! इन सबके बीच प्रीतम का दोस्त जोनी वॉकर ने पुरे कहानी में हास्य की कोई कमी नहीं की !

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प्रीतम को सीता देवी एक प्रस्ताव देती झूठ की शादी करने का ढोंग और तलाक लेके अपने जिंदगी में वापस जाने का वादा लेती ; इसके बदले प्रीतम को मिलता २५० रुपया हर महीना ; पहले तो प्रीतम नहीं मानता लेकिन मधुबाला की फोटो देख वो राजी हो जाता ; लेकिन शादी और तलाक के बाद प्रीतम अनीता से प्यार करने लगता ; सीता देवी दवाब डालती की प्रीतम अनीता को छोड़ दे लेकिन प्रीतम अब अनीता को अपनी पत्नी के रूप में देखता !

एक दिन प्रीतम अनीता को अपने गाँव ले जाता वहाँ प्रीतम की भाभी से अनीता का कुछ वार्तालाप होता !

अनीता – आप इतना काम करती थक नहीं जाती !
भाभी – अपना घर गृहस्थी बोझ कैसा ! घर के काम काज में ही गृहस्थी का सुख है !
अनीता – शादी और इतने बच्चे ; औरत की आजादी खत्म हो जाती !
भाभी – जो औरत अपने बाल बच्चे को बोझ समझे वो मान कहलाने योग्य है ?
अनीता – आपके पति कभी खराब बर्ताव करते होंगे ;
भाभी – प्यार भी तो वहीँ करते !

ये सुन ; अनीता के मन में प्रीतम के लिए प्यार उमड़ जाता !

फिर सीता देवी प्रीतम को तलाक के लिए दवाब डालती ; फिर कोर्ट , कुछ जद्दोजहत और अंत में अनीता प्रीतम को एयरपोर्ट पर खोजते हुए आती की वो चला ना जाएँ ; प्रीतम नहीं जाता और एक सुखद अंत कहानी का ! लेकिन सीता देवी जो औरत को मॉडर्न बनने की हिमायत करती दिखी पटकथा ने उसे नकारत्मक छवि की महिला बना के प्रस्तुत किया !

सिनेमा के कुछ संगीत जो कर्णप्रिय लगे ;

गायक : रफ़ी, गीता दत्त, शमशाद बेगम

# जाने कहाँ मेरा जिगर गया जी ; अभी अभी यहीं था किधर गया जी ! (जॉनी वॉकर और विनीता भट्ट)

# प्रीतम आन मिलो – क्लासिकल भारतीय संगीत ; दिल को खींचता संगीत !

# मेरी दुनिया लूट रहीं थी और मैं खामोश था ; टुकड़े टुकड़े दिल के चुनता किसको इतना होश था ! (विरह और दिल को कुरेदता गीत)

Village ice cream vendor

बर्फ वाला

बचपन में गाँव में याद है – विनिमय प्रणाली से हम बर्फ के गोले, खिलौने खरीदते थे ! आज के बच्चे “चाइल्ड डेबिट कार्ड” से आइसक्रीम खरीद लेते या मोबाइल एप्प से भी शॉपिंग ! एक कविता गाँव की उस तस्वीर को शब्द में कैद करके रख देता हूँ ; शायद गुम होती उन बातों को कभी कोई पलटेगा बीते यादों के बहाने !
Village ice cream vendor
डुग डुग करके साइकिल पर कोई आया ;
पीछे काठ के बक्से लिये बर्फ बेचने आया !

दूर सड़क पर जब वो दिखा सब बच्चों ने आवाज लगाया ;
बड़की चाची को देख सबने अपना मासूम चेहरा बनाया !

बड़की दीदी छोटी गुड़िया छोटा मुन्नू गोलू ;
खुद को जोड़ सब आठ थे गिनती का अंदाजा लगाया !

पच्चीस पैसे का नारंगी वाला पचास पैसे का दूध वाला ;
ये उस बर्फ वाले ने झट से अपना दाम हमें सुनाया !

चाची बोली पैसे नहीं आटा गेंहू मकई के बदले लो ;
मैं दौड़ के झट से बड़ा सा कटोरा ले आया !

खाट पर बैठी दादी बोली एक कटोरी ही देना उसमे ही सब लेना ;
कटोरा पूरा भर के लाओ बर्फ वाले ने वापस हमें लौटाया !

थोड़ी खींचातानी कर बर्फ वाले को किसी तरह मनाया ;
एक कटोरा मकई देके बर्फ सबने मिल के खाया !

गाँव की दुपहर सुनी पगडंडी बर्फ का बक्सा ;
चित्र ऐसा की मन मेरा यादों से भर आया !

– सुजीत