Monthly Archives: March 2015

meet with yourself

कभी रूबरू हो खुद से – A walk on night, a great meet with yourself !

कितनी आपाधापी है ना ; रेत की तरह फिसलती उम्र ; जद्दोजहत में सजते संवरते बिखरते सपने ; कभी रुकते से कदम तो कभी भागता मन ! ये सब हमारे जीवन का हिस्सा है ! इन सब आपाधापी में खुद से रूबरू होना हम भूल जाते ; कभी टटोलिये अपने मन को कितनी गांठें पड़ी है वहाँ ; कितनी ही गिरहें सिलवटें उभरी है वहाँ !

कभी सब बातों को छोड़ ; ऑफिस से लौटते महानगर की किसी चौराहें पर रुकिए ; देखिये कतार में फिसलती वाहनों को ; बहुत कुछ जिंदगी का नजरियां दिखेगा ! आये एक शाम से रूबरू होते ! किसी ने ट्वीटर पर लिखा था “कनॉट प्लेस दिल्ली में समंदर की कमी पूरा करता” जब भी राजीव चौक में मेट्रो सीढ़ी पर होता था लगता था एक बोझिल भीड़ जलप्रपात की तरह ऊपर से गिर रहा हो ; आपका मन ना चाहते हुए भी उस भीड़ को ओढ़ लेता ; जैसे कितना कुछ पीछे गुजर गया हो पीछे ! एक शाम इस भीड़ को छोड़ते हुए उस समंदर को देखने निकले ; गोल वृताकार एक जैसे भवन ; अनेकों सजी दुकानों के बीच क़दमों को बढ़ाते हुए ; शांत मन से चहलकदमी करता हुआ ! हवायें उजले उजले बड़े खम्बों के बीच से ऐसा शोर कर रहा था जैसे सचमुच समंदर की किनारों पर लहरों का शोर हो ! बस ये मन की अभिवयक्ति ही हो पर हमारा मन हर तरह की कल्पनायें गढ़ सकता और उसे महसूस भी कर सकता ! इस तरह जिंदगी से रूबरू हुई एक शाम !

meet with yourself

मन ने कुछ गिरहें खोली, कुछ बंधनों को तोड़ा एक सोच सी उभरी -” जिंदगी ऐसी ही भागती रहती हम जीना क्यों भूल जाते ; निराशा है भले ; नाकामी भी है ! पर नाकामी से ऊपर है अपना प्रयास, हमने कब कुछ ऐसा सोचा कब ऐसा किया की जो मन तक गया हो ; हमेशा ” अपनी बातें, अपनी ख़ुशी, अपनी समस्या” जो हमें ख़ुशी के पलों से दूर करता ! दूसरों की जिंदगी संवारने का हिस्सा भी बनिए ; किसी को हंसाइए ; किसी को जीवन की राह दिखलाइये ; किसी का मार्गदर्शन करिये, किसी की मदद करिये ; देखिये आपको अपनी कशमकश भी कम होती नजर आएगी !

पूर्णता की कोई सीमा होती क्या ? या पूर्णता का कोई समय ! शायद “परफेक्शन” शब्द से इसे जोड़े तो ज्यादा तर्कसंगत हो ! आमिर खान जिन्होंने अपने कार्यों से पुरे सिनेमा जगत को प्रभावित किया ! अपने परफेक्शन के लिए जाने जाते, बस काम की ततपरता ही नहीं विविधता भी एक प्रेरणाश्रोत है सबके लिए !  वो भी एक आम कलाकार की तरह कई साधारण से फिल्में ; पर जीवन को अपने मन और विचारों से बदला ; केवल अपने ही नहीं देश समाज से भी जुड़ के मन को टटोला हमारे लिए भी तो जीवन ऐसे ही है ! एक अलग विचार हम भी रख सकतें उदाहरण अनेक है बस उस परिवर्तन के लिए खुद से रूबरू होना होगा !

हर दिन को नए नजरिये से देखें ; कुछ विविधता भरे जिंदगी में ; बस अपने जीवन से नहीं सबके जीवन से जुड़ने का कुछ ऐसा प्रयास करे ! आपको बोझिल लगता दिन, माह, वर्ष हमेशा नई सौगात की तरह लगेगा !

आप भी अपने आप से रूबरू हो के देखिये ; बहुत कुछ छिपा है आपके मन में ; हम इस जीवन को भरपूर जी के ही सफल बना सकते ! भौतिक सुख सुविधायें क्षणिक सुख दे सकता पर मन का संतोष का रास्ता इस जीवन को जीने में ही है !

एक हिंदी संगीत जिंदगी से ओतप्रोत –

” रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही… ”
(इम्तिहान -)

छोड़े जा रहे इस गीत के साथ ..स्वंय सोचिये .. – #सुजीत

Take Care ! ~ Inbox Love – 9

takecare-inboxloveउस रात नींद भी तो नहीं आई थी ;
सर पर विक्स और बाम ने कुछ आराम दिया तो झपकी ली ;
बीच में घड़ी का पता नहीं मोबाइल को कई बार देखा ;
कोई न्यू मैसेज भी नहीं था !
पता नहीं कब आँख लग गयी ;

रात के किसी पहर ..
दवाई टाइम से और
टेक केयर 🙂 🙂 दो स्माइली के साथ !
मैसेज क्या दवाई है ?
दवाई की तरह ही है .. आ जाये तो आराम मिलता है !
हम्म..  एक पूर्णविराम की तरह !

संवाद में .. कुछ देर बाद ;

टेक केयर टू 🙂
मुझे क्यों ?
पता है !
क्या ?
बस ऐसे इतनी रात को जरुरु कुछ लिख रहे होगे ; फिर सुबह काम पर ..
सो टेक केयर टू थ्री एन सो ओन ! 🙂

Inbox Love Bring By – Sujit

Atonement of Words – IN Night & Pen / Inbox Love -8

एकदम रात का सन्नाटा, ध्यान से सुनो,
दिन के दबे सिसके बातों की प्रतिध्वनि;
कहीं ख्वाब जलने की तो कहीं उम्मीद सुलगने की गूँज !

उस दिन काफी खामोशी के बाद जब उसने कुछ सुना;
वक्त की झुंझलाहट शब्दों में उतर गयी उसके;
और … बात ; .. शब्दों में टूटे हुए मन को कैसे लिखा जा सकता;
इसे तो बस महसूस किया जा सकता;

प्रतिउत्तर सुनकर भर आया था दिल उसका,
जैसे कैसे उस भूल का प्रायश्चित कर दे ….
विह्वल मन कुछ प्रतिक्रिया कर खामोश हो गया !

और वो सोचता रहा, चंद शब्दों का हक तो हो सकता था,
या समझा जा सकता वक्त की झुंझलाहट को !

मन पुनः यथावत था कुछ हँसी बिखेरने की कोशिश में,
कुछ टूटे हुए लम्हों को जोड़ने में,
कैसे बिखेर दे यादें आखिर… कुछ भी या बस यही तो.. उसका निशानी बाँकी थी मेरे पास !
मैं इनबॉक्स में कुछ स्माइली उड़ेल कर खुद बीतते रात की तरह खामोश हो चला था !

SK in Night & Pen / इनबॉक्स लव !!

inbox love gtalk

GTALK – Inbox Love 7

डायरी ही थी अपनी बातों का ,
मेल बॉक्स के कोने में संदेशों के प्रवाह का छोटा सा चैट बॉक्स !

हरे रंग का चिन्ह तुम्हारे होने का और आने का ;
मैं वाइट इनविजिबल …जैसे हूँ भी .. नहीं भी.. !!

कभी ठिठक सा जाता था देख के लाल रंग के चैट स्टेटस के साथ उस नाम को ;
या तो होते थे या नहीं ; हाँ कभी कभार तुम्हें देखा था !
“डोन्ट डिस्टर्ब” लिख के बैठे लाल बत्ती से जहाँ सब रुका हुआ सा लगता था और हमेशा पूछ ही लेता था क्यों नहीं करे डिस्टर्ब ??
अरे नहीं …
बस ऐसे ही …
आपके लिये नहीं , कर सकते कभी भी ।

रोज एक नया कौतुहल था जानते क्या ?
माउस को तेरे नाम पर होवर करके देखना क्या आज वहाँ कुछ नया लिखा है जैसे …

“माय लाइफ माय रूल्स”
“हैप्पी इन माय ओन वर्ल्ड”
“लीव मी अलोन”
“साइलेंट”
“ब्लेंक”

और कभी कभी केवल स्माइली का गुच्छा । अक्सर ही बदलता रहता था कभी कभी महीनो वही परा रहता था ; अब तो यादें भी धुंधली हो गयी नजाने क्या क्या लिखा था कब से ।।

ऐसे ही सब कुछ बदल गया ना ..
स्मार्टफोन .. वो गूगल चैट हैंगआउट हो गया ।
पर मैंने चैट को हैंगआउट नहीं बनने दिया !
उस चैट विंडो में अब भी कुछ बातें रखी है ।

वो ऑरेंज वाला रोबोट स्टेटस ना बड़ा फीका सा है ; ऐसा लगता की दूर जा के खो गया है कोई ;
कोई दिन रात कब जाने कौन है नहीं है … इसने वो ग्रीन रेड इन्तेजार गुस्सा सब सिलसिला ही खत्म कर दिया ।

हाँ ये सबकी मौजूदगी का अहसास कराता रहता है ! बस ऐसे जैसे … खामोश ही सही कोई आसपास तो है ।

Inbox Love Bring By – Sujit

inbox-love-chat

सुर्ख रंग – Inbox Love 6

चारों ओर रंग सराबोर था ;
नाउम्मीद नजर इनबॉक्स पर ही टिकी थी ;
पहल मैंने भी तो नहीं की ..
तो तुमसे नाराजगी कैसी ?
यूँ ही कई रंगों के बीच पूरा दिन ऐसे ही गुजरा ;
या बिना रंगों के ही गुजरा क्या पता !
याद आया पुराने इनबॉक्स में एक बात रखी थी वैसे ही रंगों में भीगा ;
कितने रंग थे वहां कैनवास था मेरे यादों का ;
“सबसे अलग सुर्ख रंग है इसमें तेरी दोस्ती का ” ;
वो सुबह से टीवी पर गाना बज रहा रहा था ;
“होली के दिन दिल खिल जाते है दुशमन भी .. ”

दिन ढलता गया ; बिना किसी संवाद के होली का रंग हाँ हाँ फीका फागुन ;
हाथ बरबस ही मोबाइल की तरफ ;
हाँ वक़्त और मायने बदल गये लेकिन मैं उसी तरह फिर
वही सम्बोधन के साथ .. पता है हमेशा की तरह जैसे ;
” ____
मे गॉड गिफ्ट यू आल द कलर्स आफ लाइफ,
कलर्स ऑफ़ जॉय, कलर्स ऑफ़ हैप्पीनेस, कलर्स ऑफ फ्रेंडशिप … (थोड़ा मन ठिठक सा गया फिर )
कलर्स ऑफ़ लव एंड आल द कलर्स यू वांट टू पेंट इन योर लाइफ। 🙂 ”
अपना ख्याल रखना और पूर्णविराम के पहले हँसी बिखेरनी वाली स्माइली भी एक ही आज लगाई !

मैसेज को बहुत देर तक देखता रहा जाते हुए .. जैसे वो मेरी गिरफ्त को ढीली कर रहे और कहीं जाते जा रहे !!

inbox-love-holi-color

Inbox Love Bring By – Sujit

colors of life in words

कौन सा रंग ….

colors of life in wordsकिस रंग तुझे ढूँढू ,
कौन सा रंग लगाऊँ !

जिस रंग सखा तुम खोये ;
उस रंग को कैसे मिटाऊँ !

तू जो फिर लौटे तो ;
हर रंग में मैं रँग ही जाऊं !

तुझ बिन कहीं चैन नहीं था ;
तुम बिन बेरंग पल ही बिताऊँ !

मौन रंग में कभी मैं चाहूँ ;
फिर शब्दों के रंग सजाऊँ !

विगत स्मृति के चिन्हों से ;
यादों के रंग भर के लाऊँ !

मैंने तो हर रंग उकेरे ;
तुम बस श्वेत श्याम ले आये !

कुछ और रंग तुम भी लाते ;
थे आस जो मेरे मन में समायें !

मेरे नजरों ने थे हर रंग समेटे ;
अब क्यों सब बेरंग नजर से आये !

सुर्ख़ रंग हो वहाँ भी हरदम ;
यहाँ भी रंग रंग मैं तर हो जाऊँ !

सुबह संग कभी शाम रंग ;
मैं तो जीवन के चित्र बनाऊँ !

~ सुजीत