Poetry

सरहदें – Wound of Kashmir

दो अपनों ने मिल के उड़ाया था, कभी उस सफ़ेद कबूतर को । दो अपनों के घरों के बीच ; उसे सरहदों का क्या पता था । खुली आसमानों और हवायें दोनों तरफ तो एक सी थी । एक दिन उसकी परों को काट दिया किसी ने ; कुछ लहू की बुँदे झेलम में घिरी […]