Monthly Archives: October 2014

लौट के यादें शहर को आई – Autumn Back To The City

{महानगर बसेरा है आगंतुक प्रवासी अनेकों लोगो को – छुट्टियों में घर को लौटना फिर महानगर की भीड़ में शामिल होना; कुछ जो अभ्यस्त है आने जाने की प्रक्रिया से कुछ नये संगी साथी पहली बार घर जाते ; इसी लौटने और पुनः जीवन की आपाधापी में खोने की एक कविता – सुजीत }

रस्ते पर फिर भीड़ हो आई,
छुट्टियों से लौट के यादें शहर को आई ।autumn-back-fall-late-autumn-lonely-man-Favim.com-67059

बीत गया सावन अब तो ;
सर्दी की सुबह की ठंडी हवा खिड़की पर हो आई ।

हो गयी फिर भीड़ में शामिल ये कदमें,
जिन्दगी जीने से फिर वाकिफ हो आई ।

उसे तजुर्बा कम था लौटने का,
यादें उसके संग ही लौट कर आई ।

रंग ढंग सीख लेगा कुछ वक़्त हो जाने दो,
खुद में सिमटने का हुनर अब उसमें हो आई ।

ये मौसम लौटा है ख्वाबों को लेकर,
उसकी आँखों में एक खुशी सी नजर है आई ।

इस तरह छुट्टियों से लौट के यादें शहर को आई ।

#SK

परछाइयाँ – Shadow of a Soul

shadowपरछाई सी थी साथ साथ चलता मालूम होता था ;
जैसे एकपल हाथ छू गया होगा तेज क़दमों में ;
तूने समझा उसकी साजिश सजा में हाथ छुड़ा लिया ;
बस वहीँ ठिठक कर रुक गया था वो आगे नही गया ;
सर पर धुप थी खड़ी परछाई उसकी पैरों में आ पड़ी ;
पर वो दूर जाते देखता रहा, जाता साया लम्बा दूर होता रहा !

अब शाम थी सारी परछाइयाँ सिमट कर नजाने;
कहाँ खो गयी थी, भीड़ थी पसरी कितने चेहरों की ;
कोई साया नही था अब था तो जीता जागता हर सख्स ;
वो सोचता रहा परछाईं जो साथ साथ चलती रही उम्र भर ;
कहाँ किस कदर खो गयी उस दूर ढलते आसमानों के पार;
जाती परछाई कह रही थी उसे आभाषी दुनिया का इंसान !

आभाषी दुनिया परछाईयों की जो ना बोलती है ,
जो ना कभी सुनती है जो ना कभी समझती ;
साथ चलने वाली परछाइयाँ जिसे छुआ नहीं जा सकता ;
हाथ पकड़ कर उन सायों का दुर जाया नहीं जा सकता ;
फिर कैसे उस दिन उन सायों ने दामन छुड़ा लिया ;
शायद वो परछाइयाँ कहती रही कहती रही ;
आभाषी दुनिया के इंसानो में जीवन नहीं होता !

#SK

SK Video Poetry

एक पेड़ – Life of a Tree – Hindi Poem Recites By Sujit

एक पेड़ – Life of a Tree – Hindi Poem on Tree Written & Recites by Sujit. My First Audio Poetry ! ‪#‎SK‬ .. Will Try To Improve Voice & Video Quality in next poems; Great Learning Experience With Adobe SoundBooth & Apple iMovie With Help of This Tools I converted my Poetry in Audio and Recite my 1st one.

Hindi Poem on Tree Life

एक पेड़ – Life of a Tree

Hindi Poem on Tree Lifeउफ्फ तक नहीं करता बदलते मौसमों से,
डटा तना पत्थर सा बन खड़ा रहता ;
हरपल हरयाली बन मुस्काता रहता ;
ये बिखरे बिखरे शाख ही मेरा अक्स है !

गिर जाती है पत्तियां मेरी कई ;
छूट जाता है इनसे नाता मेरा ;
असह दुःख को झेल जाता ;
उफ्फ तक नहीं करता मैं ;
ये बिखरी बिखरी सुखी पत्तियां ही,
तो जीवन का सत्य है !

अपने फूलों की महक दे जाता ;
उगते फलों का जीवन दे जाता ;
मुझपर लगी झूलों को बचपन दे जाता ;
और अंत मौत की दहक दे जाता ;
क्या मेरे देने का कोई अंत है ?

मैं एक पेड़ हूँ कहीं खड़ा ;
मेरा जीवन अब अनंत है !!

#SK { एक पेड़ जो अनेकों मौसमों को झेलता और हमें कुछ सिखाता ; एक कविता पेड़ और जिंदगी के संदर्भ में !  }

Life Poetry Sujit

कल का नशा …. #SK

life-is-a-story-quotes-sayings-picturesकल का नशा आज चेहरे पर,
धीमे धीमे आँखों से उतर जाता !

दिन की थकन रात की आगोश में जाती;
सुबह होती और फिर सब संवर जाता !

बिखरा बिखरा तुझसे कुछ कहता ;
क्या सोच फिर फासला बना लेता !

कब तक रुकूँ और देखूँ तेरी राह ;
कुछ सोच यूँ राहों पर निकल जाता !

क्या रुके और देखे इसका चेहरा ;
बड़ी तेज है जिंदगी रोज ही ढलती !

ढलता ही रोज बोझिल शामों में ये ;
अँधेरों में गुजरकर बिखरता निखरता !

ये जिंदगी जो भी है ऐसे ही जीता !

ख़ामोशी का मौसम – Seasons Of Life

seasons-of-life

देखो ख़ामोशी का मौसम फिर आया,
थोड़ी मायूसी संग फिर लौट आया ।

बुँदे बिखर कर अब कुछ ना वो बोले,
अब मेरी खामोशी कैसे लब खोले ।

बेरुखी धुप अब निकल कर आयी,
तेरी याद भी बिखर कर ही आयी ।

पतझर में जैसे मन ने उतार दिया हर लिबास,
और धीरे धीरे मन की हर छुट गयी आस ।

झाँके जा के हर आहट पर हो कोई,
फिर ना आये इस मौसम भी कोई ।

सावन बीती मन तो अब शिशिर संग डोली,
सुबह की धुप खिली शाम की ओस हुई रंगीली ।

यादों का मौसम फिर लौट आया,
ख्वाबों का बादल फिर से है छाया ।

देखो ख़ामोशी का मौसम फिर है आया ।

#SK

इस शहर .. उस शहर !!

इस शहर . . उस शहर,
जिन्दगी होती बसर,
रेत मिट्टी धूलों का रस्ता,
सबकी मुझको है खबर ।

एक मुट्ठी आसमां,
आँखें करती सब बयाँ,
नींद ख्वाब मन को डंसता,
होती मुझको सब फिकर ।

चेहरा चेहरा फिर से ठहरा,
बात बोली नयी नवेली,
लौटी बातें लम्बी रातें,
आँगन में सब बैठा हँसता ,
सबकी मुझको करनी जिकर ।

फिर कुछ कदम कुछ लेके दम,
थोड़ा नम कुछ कम होता गम,
कटता रहता तेज वक़्त बहता,
कौन मेरा अब रह गया रह्गुजर ।

जिंदगी अब रह गयी इस शहर .. उस शहर ।

#SK