लौट के यादें शहर को आई – Autumn Back To The City

{महानगर बसेरा है आगंतुक प्रवासी अनेकों लोगो को – छुट्टियों में घर को लौटना फिर महानगर की भीड़ में शामिल होना; कुछ जो अभ्यस्त है आने जाने की प्रक्रिया से Read More …

परछाइयाँ – Shadow of a Soul

परछाई सी थी साथ साथ चलता मालूम होता था ; जैसे एकपल हाथ छू गया होगा तेज क़दमों में ; तूने समझा उसकी साजिश सजा में हाथ छुड़ा लिया ; Read More …

एक पेड़ – Life of a Tree

Hindi Poem on Tree Life

उफ्फ तक नहीं करता बदलते मौसमों से, डटा तना पत्थर सा बन खड़ा रहता ; हरपल हरयाली बन मुस्काता रहता ; ये बिखरे बिखरे शाख ही मेरा अक्स है ! Read More …

ख़ामोशी का मौसम – Seasons Of Life

देखो ख़ामोशी का मौसम फिर आया, थोड़ी मायूसी संग फिर लौट आया । बुँदे बिखर कर अब कुछ ना वो बोले, अब मेरी खामोशी कैसे लब खोले । बेरुखी धुप Read More …