कई अधूरी कवितायेँ है ….

कई अधूरी कवितायेँ है पड़ी, कुछ की लिखावटें धुल गयी, कुछ की स्याही फीकी हो गयी ! कुछ शब्दें थी जो हर सुबह आस पास लिपट जाती थी जैसे वो Read More …

एक गुड़िया परायी -२

बचपन की निश्छल अल्हरता को, को कभी झुँझलाहट बनते देखा ! जो खुल के भी कभी रोते थे, उसे चुप हो के सिसकते देखा ! किसी आँगन में जो खेला Read More …

अंतिम परिभाषा ….

इस अनंत सफ़र की अंतिम परिभाषा क्या है ? सोच रखा है .. अपनी बात मनवाने की जिद कर, कुछ क्यों नही लगा ऐसा कभी ? स्वार्थ भर आया है Read More …