Night & Pen

कितना एकाकी है इस भागदौर में इंसान ?? – Thought with Night & Pen

कितना एकाकी है इस भागदौर में इंसान ; अनमने ढंग से सुबह में अपने आपको इस भीर के लिये तैयार करता हुआ ! महानगर की जिंदगी .. वक्त की कमी और ऊहापोह ने सब रिश्तों को बदल दिया है ! जिंदगी जीने की पूरी रुपरेखा तो बुन लेते, प्रोफेशनलिज्म में सराबोर करते जाते अपने आप […]

Poetry

ख्वाबों की भी कोई दुनिया है क्या ?

खामोश जुबाँ से हो जाऊँ अजनबी ; या सब कहके बन जाऊँ मैं गुमशुदा ! मैं अब रोज दुहरा नहीं सकता .. बीती बातों का किस्सा फिर से ! कई बरस बीता कितना, मुझे तो हर दिन हर लम्हा याद है ! लगता है ना कहानियाँ हो किताबों की, वो अल्फाज़ वो शिकवा वो यादें, […]

Poetry

Words of Night – #Micropoetry

Mine and Your Words, May never together so more … Listening to silence, Now A Faded vigor … Sound of seashore steady ensure, like a dawdling night hurting  so more … Still in front of you, how can conceal  words so more … #Micropoetry : SK

Poetry

मंदिर के सीढियों पर …

बीते रात के ख्वाब को एक दिन, मंदिर के सीढियों पर देखा । माथे पर कुमकुम का टीका, थाल अरहुल थे सब सजे । बीते रात के ख्वाब को, सीढियों पर धीरे धीरे जाते, ख्वाब को ओझल होते देखा । मेरा अर्चन ही क्या था, वहाँ जैसे निश्छल सादगी को देखा । तम था मिट […]