मैं ये सोच कर ये उसके दर से उठा था .. (भूले बिसरे गीत)

“हकीकत” फिल्म से भूले बिसरे गीत में रफ़ी साहब .. मैं ये सोच कर ये उसके दर से उठा था ; की वो रोक लेगी मना लेगी मुझको ; हवाओं Read More …

इस बरस की क्या क्या सौगात है … Memories never die !

memories of year

दुआ लब्जों में समेटे, दिल में कई जस्बात है ! ना रूबरू हो सके कभी, इस सफर में ना कोई पास है ! कुछ शर्त ना थी साथ आने की, Read More …

गिरह – Knot of Life : #Night & #Pen !

गिरह ऐसी भी नहीं थी की टूट जाती, हाँ कुछ बन्धन जो वक्त, मायूसी, खामोशी के थे ..सब आजाद है अब ! मैं इस इल्जाम का इतना भी हक़दार नहीं Read More …