Poetry

नव वर्ष – फिर सजेगी बिसातें !

नव वर्ष जैसे बारह खानों में फिर सजेगी बिसातें, हर दिन की कहानी और किरदारों का रंगमंच ! कुछ कोसते हुए चालें चाली गयी होंगी, कुछ दंभ टूटा होगा किसी किरदारों का ! कुछ मोहरों ने खींचे होंगे पांव पीछे ; कुछ मोहरों ने दिखाया होगा जज्बा ! कुछ अफ़सोस हुआ होगा अपनी बाजी का […]

Night & Pen

गंतव्यविहीन … In Night & Pen

लंबी समांतर रेखा खींचता हुआ ये काफिला जिंदगी का बहुत दूर हो आया था; ऐसे कितने दफा कोशिश की, साथ साथ चलती ये रेखाएँ काट के निकल जाये, अपने गंतव्य की ओर, ये समांतर चलना निश्चित दूरियों को बनाएँ, और नजदीकियों को भी ! बहुत कशमकश से शब्दों को बुनता हुआ; लिपट जाता किस पशोपेश […]

Poetry

शीत की आँगन !

सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया; फ़िक्र लौट आयी थी उनकी आज ! फिर कुछ सरसरी हवा छु गयी होगी, फिर अब बचपन लौट गयी होगी ! ना मानी होगी बात फिर किसीकी, हो आये होंगे गलियों में यूँ ही ! कुछ शरारतें कुछ बेबाक सा मन, भागती फिरती चहकती शीत की आँगन ! आ […]

Poetry

कुछ खोने का अहसास !

मैं अब कैसे शिकायत भी करू तुमसे, तुम खफा हो के कुछ और दूर चले जाओगे ! ये फासले या वक्त की क्या साजिशे थी, कुछ खोने का अहसास अब पनपने लगा था ! बहुत सब्र से देखते तेरी खामोशी, कोई शिकायत नहीं जहन में ! एक दिन बेसब्री टूटेगी मेरी, फिर शायद सदियों तक […]

Poetry

जिंदगी तू भी अब तो साथ दे थोड़ा !!

मैं अपनी हर रीत निभा रहा .. जिंदगी तू भी अब साथ दे थोड़ा ! मैं हर सुबह चहक उठता; पर तू शाम तलक मायूस कर देता ! चलो छोड़ चला लड़कपन, रूठने मनाने का ! चलो दूर हुआ बचपन, हर पल मुस्कुराने का ! चलो गिरवी रखा रात के ख्वाबों को, कुछ तो अब […]