Monthly Archives: December 2013

नव वर्ष – फिर सजेगी बिसातें !

Prokop-Shipwreck-Titanic

नव वर्ष जैसे बारह खानों में फिर सजेगी बिसातें,
हर दिन की कहानी और किरदारों का रंगमंच !

कुछ कोसते हुए चालें चाली गयी होंगी,
कुछ दंभ टूटा होगा किसी किरदारों का !

कुछ मोहरों ने खींचे होंगे पांव पीछे ;
कुछ मोहरों ने दिखाया होगा जज्बा !

कुछ अफ़सोस हुआ होगा अपनी बाजी का !
तो कहीं अभिमान होगा अपनी राहों का !

ना शिखर पर पर पहुँचा अभी;
कईं चालें और बाजी बची है अभी !

Happy New Year 2014 – नव वर्ष की शुभकामनाएँ – सुजीत

Image Credit: iplayoochess.com

गंतव्यविहीन … In Night & Pen

लंबी समांतर रेखा खींचता हुआ ये काफिला जिंदगी का बहुत दूर हो आया था;Autumn Mountain Foliage
ऐसे कितने दफा कोशिश की, साथ साथ चलती ये रेखाएँ काट के निकल जाये,

अपने गंतव्य की ओर, ये समांतर चलना निश्चित दूरियों को बनाएँ,
और नजदीकियों को भी ! बहुत कशमकश से शब्दों को बुनता हुआ;
लिपट जाता किस पशोपेश में फिर … क्योँ कैसा जिक्र ..

बस सवांद था संशय भरा, सीमाओं में सिमटा हुआ,
बनावटी चेहरों से इजाजत ना थी सब कह जाने की .. क्या अधूरा ही था ये संवाद..

{ शब्दों को जितना बिखेरा मन से …
सब मुझसे अपना मर्म पूछते है ! }

क्या जवाब दूँ अपने सब शब्दों का ..क्या मर्म था उनका ?
खुद वाकिफ हो हर राहों और मंजिलों से .. अपने उधेरबुन में वो कुछ उम्मीदों को तलाशता रहता..
यथावत अपने मन से लड़ता हुआ …. समांतर पथ पर अपने कदमों से दूर जाता हुआ !
गंतव्यविहीन ….. गंतव्यविहीन …!!!

□■ SK ■□

शीत की आँगन !

सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया;winter_love_by_louiezong-d5hjji3
फ़िक्र लौट आयी थी उनकी आज !

फिर कुछ सरसरी हवा छु गयी होगी,
फिर अब बचपन लौट गयी होगी !

ना मानी होगी बात फिर किसीकी,
हो आये होंगे गलियों में यूँ ही !

कुछ शरारतें कुछ बेबाक सा मन,
भागती फिरती चहकती शीत की आँगन !

आ रही थी यादें कितनी,
इस धुंध से लिपटी हुई !

सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया…..

सुजीत 

Photo:
http://louiezong.deviantart.com/art/winter-love-331796091

कुछ खोने का अहसास !

मैं अब कैसे शिकायत भी करू तुमसे,SK-poem-art
तुम खफा हो के कुछ और दूर चले जाओगे !

ये फासले या वक्त की क्या साजिशे थी,
कुछ खोने का अहसास अब पनपने लगा था !

बहुत सब्र से देखते तेरी खामोशी,
कोई शिकायत नहीं जहन में !

एक दिन बेसब्री टूटेगी मेरी,
फिर शायद सदियों तक बुत बन जाये हम !

शायद एक दफा तुम समझा देते इसे,
मेरे कदम मुझे दूर जाने ही नहीं देते !

इतने पुकारों पर जो ना बोला कुछ,
जिद तोड़ समझ क्योँ नहीं लेता मेरा मन !

कभी महसूस कर लेना मेरी आहट अपने आस पास,
कभी हम बिन आवाज किये दरवाजे से लौट जाते है !

#Sujit [In Poetry]

जिंदगी तू भी अब तो साथ दे थोड़ा !!

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मैं अपनी हर रीत निभा रहा ..
जिंदगी तू भी अब साथ दे थोड़ा !

मैं हर सुबह चहक उठता;
पर तू शाम तलक मायूस कर देता !

चलो छोड़ चला लड़कपन,
रूठने मनाने का !

चलो दूर हुआ बचपन,
हर पल मुस्कुराने का !

चलो गिरवी रखा रात के ख्वाबों को,
कुछ तो अब तू भी लौटा जरा !

सोच लिया छोड़ने की हर चीजे,
कुछ पाने की राह दिखा जरा !

वक्त सिमट कर दोहमत लगा रहा,
जिंदगी तू भी अब तो साथ दे थोड़ा !

:- सुजीत