Monthly Archives: October 2013

An Autumn Dreams – In Night & Pen With #SK

कल की दबी बिसरी झुंझलाहट;
सुबह भी जारी थी
सीढ़ियों से उतरते,
घुमावदार बोझ सी लगती,
ये चडाव और उतार सीढ़ियों की !झुंझलाहट उतार भी दे किसपर; उसपर जो अनसुना था मेरे बातों से !
शाम सड़क पर जैसे साल का अंतिम पड़ाव, उसके बचे कुछ महीने !मौसम भी जैसे यादों का एक कोना छुपाये, कैसे अनजान गलियों में सर्दियों के ठीक पहले,
थोरे ठण्ड के बीच ! अनजान से चेहरों में कौतुहल के साथ गुजरता, जैसे मन को बता रहा !

आगे २-३ गली के बाद मंदिर और फिर किराये का वो मकान !
और वही सीढियाँ  …

बीते साल ने कई किस्से .. कई यादें उड़ेले !
हवाओं में फिर वही महसूस हुआ थोरी सी सिहरन शाम की ..
कदम रुकते रुकते बढ़ चला मन पीछे मुड, नजाने किन रिश्तों की बाट जोह रहा था !

Night & Pen : SK

ठहर जाने का सबब !

कहते कहते ठहर जाने का सबब,
फिर वही बातें, वही रातें !

चाँद सी सादगी दिखती ऐसी,
फिर वही अजनबीपन छाया ..
शब्द घुटते रहे, करते रहे अदब !

थे बेबाक अनेकों वहाँ हुजूम में,
उम्रदराज सी आँखे लिये पल भर,
जी भर के देख मासूम था चाँद,
अब भी वहीँ !

फिर सिमटे लब्जों के ढेर लिये ..
क्यों या क्या पूछुं ..
बस ऐसे ही था हर दफा;
कहते कहते ठहर जाने का सबब !

#SK 

पूर्णविराम – Epic Life !

मौन हूँ ..खो गया हूँ में आस पास;
इस भीड़ में !

लड़खड़ा जाती है शब्दें,
टूट जाती है पंक्तियाँ,
पूर्ण कर दो अधूरे संवादों को,
एक पूर्णविराम देकर !

विस्मित है मन,
भ्रम कैसा जैसे किसी,
पटाक्षेप में कोसा गया मैं,
कुछ चंद वार्तालापों में सोचा गया,
बेमन की हँसी बिखेर दी !

अंतरद्वंद्व में उलझा गुजरा,
व्यर्थ के पहर बीत गये,
अब अर्थ दे दो बचे वक्त को
एक पूर्णविराम देकर !

कुछ तस्वीरें – The Unfinished Painting

कोरा कागज .. कोरी कल्पना सारी !
यतार्थ कुछ भी नही है ..
बस लहरों का एक सैलाब;
आता और बिखेर देता सारी;
बनाई तसवीरें !

समेट के लौट आया वहाँ से,
वो अधूरी तसवीरें अब यादों में;
फिर सोचुगा बनाऊंगा उसे,
जोड़ुगा हर उलझे हिस्से !

रेतें, यादें, शिकन की कितनी लकीरें,
पथरीली राहें, बेजार मन, कितनी यादें परी,
रात लंबी है परी कुछ तस्वीरें बनाने को !

SK
Image : http://www.huffingtonpost.com/james-elkins/post_1691_b_819376.html