Poetry

बंदिशें – An Urban Ode

अनजान अकेली सी है ये राहें सदियों से,करवट भी नही ले सकती ऐसी बंदिशें ! ये बड़ी ऊँची ऊँची गगनचुम्बी महलें,लगता सूखा लंबा बरगद खड़ा हो ! बेरंग सुख गयी है इसकी हर पत्तियाँ,पर रंग रोगन से सजाया गया है इतना ! किर्त्रिम रोशनियों में नहलाकर इनको,देखो कैसे हरे रंग खिलते है इन पर ! […]

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क्या गुनाह है .. ?

है रात मुफलिसी की,ताक पर लगा नींदों को,और लगा चैन के हर कोने,चाहत सुबहों पर लगाना ! क्या गुनाह है .. ? माना नसीबों पर नहीं इख्तियार,और उम्मीदों के कितने बोझ तले,एक छोटा कोना सजाना,रंजो गम में थोरा मुस्कुराना ! क्या गुनाह है .. ? सजाये ख्वाब ना पूछा तुझसे,तो अधुरा ही सही,कुछ चाहत जताना,यादों […]

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एक उड़ान – Dead Dream in Sky

एक पंछी उड़ता हुआ खुले आसमां में,क्या सपने उसके क्या मन में उसके,सहसा इच्छाओं का इर्धन खत्म सा हो गया ! बिना उर्जा के सीधा गिरता कटीले पथरीले झारियों में,बिखर गये पत्थरों से टकराकर उसके पंख ! टूट से पंख, लहुलुहान वो फरफराता,उड़ने की तमाम नाकाम कोशिश नाकाफी थे,कुछ दूर घसीटता कराहता वो निढाल निष्प्राण […]

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एक रोज तुम .. Untouched Thoughts

कुछ ठहर गये थे तुम,कुछ कहते कहते रुक गये ! तुमने शायद रिश्ता पुराना सा,कुछ ऐसा बोला था धीमे से ! बस हम उम्मीद में है,बात कब पूरी होगी वो ! ना हम बता पाते कभी भी,ना जता पाते अपना रिश्ता ! एक दिन सब कह जायेंगे,तुझसे तो हँस के बात कर लेता ! ऐसे […]