Poetry

हाथ का धागा – Band of Memories

हाथ का धागा, लिपटा रहता जैसे एक निशानी हो किसी की ! कस गयी है इसकी बंधन,घुटन सी भी होती कभी, तोड़ देने की ! बेजार मन ही कह देता, उताड़ क्योँ नही देते हाथों से ! याद है एक दिन पूजा पर बाँधी थी,और किसी दिन साथ में २-४ मोतियों वाली,ये तुमने दिया था […]

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झींगुर – Now Life on Urban Ladder

याद है वो सन्नाटा दस सवा दस का,वो गाँव में जाते कभी छुट्टियों की रात,झींगुरों की झन्न सी अनवरत ध्वनि,आज भी कौतुहल सी करती मन में ! ये आवाज सन्नाटे में एक डर सा,पर सुकून समेटे अनेकों रातों का ! आज शहर के शांत गगन में,खोये रहते एक वीरान अधर में,डूबे काले होते रातों के […]

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एक कोई – Anonymous Thoughts of Morning

चाँद रात की आगोश में था छुपा छुपा,दिन हुए फिर ओझल हुआ जा रहा वही  !ये कौन है जो इन से परे हक़ बता रहा कोई,वक़्त की सारी कोशिशे है पास लाने की,हर तरफ ऐसा लगता दूर जा रहा कोई ! आहट बता रहा तेरे होने की,दिल सोचता आ रहा कोई और जा रहा कोई,ख्वाबों […]

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तेरी सुबह – Your Morning

जिन पौधों को तुम सींचते,आज देखो खिल खिला बुला रहे तुम्हें ! आसमां  से ओझल होते तारे सारे,कह रहे जाते देखो हो गयी तेरी सुबह ! कोई सोच रहा, आज किस नाम से बुलाये,इक  नई अब हुई फिर से ये तेरी सुबह ! मुंडेरों पर जो आते रोज पंछी,चह चहा पूछे कैसी है तेरी सुबह […]

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Words of Night – In Night & Pen

ऐसे तो कुछ कहीं बातें थी उस दिन, जैसे अनमने ढंग से टालने की कोशिश और मन समझ लेता दूर उठते हर तरंगों को !उस दिन पूछ ही लिया, की रोज तो मन झुंझला कर मैं, खुद समझा कर सो ही जाता था, रात की गोद में अनेकों अधूरे बातों को लिये !जाने अनजाने आदत […]