Monthly Archives: June 2013

जिन्दगी बसर जरुर हो जायेगी – Life Left To Go

उलझनों भरी राहें ऐसी..
मंजिल से अनजान बन,
जिन्दगी बसर जरुर हो जायेगी !

आदतन रात की गोद में सर रख,
ज्यों ही कुछ सोचते,
और सुबह हो जाती,
ये बड़ी वक़्त पाबंद घढ़ीयाँ,
कुछ रुक रुक के क्यूँ नही चलती !

रोज टूटता मकसदों के मोह में,
और शाम को एक पथिक सा बन,
जिसे वर्षों से गुजरते गुजरते इन गलियों से,
कोई चाह नहीं हुई, उसे प्यारी नही ये गलियाँ !

यादों से रोज कह लेता था वो किस्से,
हर दिन के, सुबह और शाम वाले,
अब बिखरे किस्सों को हिचक जाता कहने से !

सोचता यादों के बिना मंजिल नहीं कोई,
जिन्दगी बसर जरुर हो जायेगी !

एक सुबह कुछ ऐसे .. ! Bird, Butterfly & Morning

चाँद की पंखुरियाँ सिमट गयी,
हरी पत्तियां और कोपले,
निकले अपने खोले आँखे,
देखो छोटे छोटे चिड़यों के बच्चे,
उनके कलरव तुझसे ही मिलते है,
आके जरा देखो तो उन्हें,
जो आ गयी है तेरी मुंडेरों पर !

सीढ़ियों से उतरते एक सुबह,
एक अहसास में कमी सी लगी,
शायद तेरे पेरों में आज पायल नही थे,
ये आँगन तो राह बिछाये थे,
हर सुबह हो तेरे कदमों की आहट,
वो पायल की झंकार उसके कानों पर परे !

तितलियों से नन्हें पाँव तेरे,
घरोंदे देहलीजों से होते हुए,
रंगबिरंगी सी इस मुस्कुराती,
सुबह को क्या नाम दे ?

Sujit

इक ख्वाब था…!

शाम अधूरी, अधखुली नींद से..
इक ख्वाब था वो, अधूरा सा छुटा !

मन विस्मृत, एक डगर को चला,
दूर कदम पर, एक भीढ़ सी टोली !

हाट कोई था, फल सब्जी के ठेले,
एक कोने में मचल रहा रंगीन गुब्बारा,
ठिठका वहीं, भा गये गुब्बारें !

सोचा ले मैं क्या करता उसको,
देख फिर उन रंगों को निहारे !

भटक हाट के दो फेरे लगाये,
मन खोया था उस ख्वाब किनारे !

बिखरे बिखरे शाम को छोड़े,
आँखे कहती फिर एक रात बुलाये !

नींद बिखरे है, ख्वाब पसारे,
चाँद से पूछा क्या मन में तुम्हारें !