Monthly Archives: March 2013

Faint And Fairy Colors of Life !


यूँ तो रंग बहुतेरे ए जिंदगी ..
कुछ दिखा रंग कुछ छिपा रंग !

कुछ रंगों ने रंग दिया हमें..
कुछ रंगों ने ठग लिया हमें !

कुछ रंग थे जैसे एक नयी कहानी..
कुछ रंग था जैसे बिसरी वो कहानी !

यादों में रंगीन तस्वीर बनाई..
लम्हों लम्हों की सब याद सजायी !

तेरे इंतेजार ने कुछ रंग चुराये ..
रंग तो तेरे भी खूब छाये थे हम पर !

हमें तो तस्वीर अभी भी अधूरी लगती,
भरेंगे कुछ और रंग सफर अभी जारी है ..!

: – सुजीत भारद्वाज

लाल स्याही … A Treasure !



क्योँ अलग विजाती से बैठे,
आँगन के उस पार अकेले,
ढोल नगारे कानों से टकरा कर,
वहीँ निस्तब्ध से हो चले,
गुमसुम से बस तकते उस भीड़ को,
हिस्सा जो नहीं उस उत्सव का मैं !

मैं जानती रीती रिवाजों से बने,
इन कोरे चित्रों को, रंग थे जिनमे अनेकों,
बस वक्त के हाथों से फिसल गयी लाल स्याही,
अब अँधेरा अँधेरा ही है हर तरफ,
होती जब सुबह ये रंगहीन क्योँ है सबकुछ,
यादों को टटोलते..झुंझलाते मन को,
हर तरफ बहलाती चौकठों को करती आर पार !

जैसे रुक गया हो जीवन चक्र मेरा,
सरसराते पुराने पत्ते ढेर से बिखरे,
कह रहे खामोश हो के, गया बसंत,
ना लौट के आने को फिर …
डाल टहनी सब खंडर !

हाथ फीके, गहने छुटे,
यादें अब मेरे नीर पोछे,
आँखे धुँधली कदम लरखराई,
बस वक्त के हाथों से फिसल गयी लाल स्याही !