Monthly Archives: January 2013

फिर बात मेरी .. Yet Again

ये किस जवाब के बदले..
फिर कुछ सवाल थे तुम्हारे !

हँस कर ही खामोश हो चले हम..
बहल ही गया ना फिर,
बात अपना अनेकों इन्तेजार करके !

फिर वही कुछ पुराने वादों में घिरे,
किसी बनावटी किस्सों में उलझे,
बात आ निकली घुमावदार रस्तों से !

असमंजस मेरा, या फिर झुके मन मेरा,
अपनी ही हार सही हुई हर बार की तरह,
इस कदर सहम जाता, कब समझा पाऊ बात मेरी,
या कोई अभिमान ना ले जाये तुझे दूर कहीं !

कोशिश तो की हाथ छुराने की पर..
परी हुई है किन यादों की गाँठ कई !

#Sujit ..

पूस के मेले – Winter @ India


लगे खेत में पूस के मेले,

सरसों अरहर मस्ती में खेले !

ठीठुरी पुरवा पवन बहके है हौले..
अलसी व गेहूँ की बालियाँ डोले !

विहंग तरंग बांस पर झूले,
खेत पर जाने अलसाते भूले !

आग लपेटे अलाव पर जब बोले,
शाम समेटे कई किस्सों को खोले !

धुप धुंध से आंख मिचोली खेले,
निर्जन मन कैसे इस शीत को झेले !

कोई रात विरह में नैना खोले,
कोई शांत शीत ओस संग सो ले,
कोई शरद शराब, तो कोई चाँद को छु ले !

निर्जन मन कैसे इस शीत को झेले !