Poetry

फिर बात मेरी .. Yet Again

ये किस जवाब के बदले..फिर कुछ सवाल थे तुम्हारे ! हँस कर ही खामोश हो चले हम..बहल ही गया ना फिर,बात अपना अनेकों इन्तेजार करके ! फिर वही कुछ पुराने वादों में घिरे,किसी बनावटी किस्सों में उलझे,बात आ निकली घुमावदार रस्तों से ! असमंजस मेरा, या फिर झुके मन मेरा,अपनी ही हार सही हुई हर […]

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पूस के मेले – Winter @ India

लगे खेत में पूस के मेले, सरसों अरहर मस्ती में खेले ! ठीठुरी पुरवा पवन बहके है हौले..अलसी व गेहूँ की बालियाँ डोले ! विहंग तरंग बांस पर झूले,खेत पर जाने अलसाते भूले ! आग लपेटे अलाव पर जब बोले,शाम समेटे कई किस्सों को खोले ! धुप धुंध से आंख मिचोली खेले,निर्जन मन कैसे इस […]