नव वर्ष – फिर सजेगी बिसातें !

नव वर्ष जैसे बारह खानों में फिर सजेगी बिसातें, हर दिन की कहानी और किरदारों का रंगमंच ! कुछ कोसते हुए चालें चाली गयी होंगी, कुछ दंभ टूटा होगा किसी Read More …

गंतव्यविहीन … In Night & Pen

लंबी समांतर रेखा खींचता हुआ ये काफिला जिंदगी का बहुत दूर हो आया था; ऐसे कितने दफा कोशिश की, साथ साथ चलती ये रेखाएँ काट के निकल जाये, अपने गंतव्य Read More …

कुछ खोने का अहसास !

मैं अब कैसे शिकायत भी करू तुमसे, तुम खफा हो के कुछ और दूर चले जाओगे ! ये फासले या वक्त की क्या साजिशे थी, कुछ खोने का अहसास अब Read More …

जब शब्द खामोश हो – तस्वीरें बोलती : My Paintbrush & Art Collection

जब शब्दें खामोश हो जाती, तब तस्वीरें बोलती, इनमे छुपा होता एक मर्म, एक वक्त .. एक याद .. एक पुकार … एक खामोशी .. एक कला .. एक आत्मा Read More …