Poetry

पत्थर का बुत !

 एक बार — ! यूँ किसी हमराह का असर है..! ये पत्थर का बुत भी करवटें बदलता है ! पर .. हमे डर है पत्थर का बुत कहीं इंसान ना बन जाये ! फिर —! ये पत्थर का बुत जिसे इंसान बनाया था किसी ने, इंसानों जैसे दिये थे अरमां ख्वाब सजाने के तुमने, आज […]

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थे साथ कभी – All Together ??

इन राहों से कितने बिछड़े,जहाँ हर सुबह महफ़िल बनती थी, पूछते थे खबर हर यारों की, तेरे रंग मेरे रंग बादलों सी सजती,मन सपने बुनती संवरती..और फिर धुँधली सी परती ! क्या में क्या तु, क्या कोसे किसको,तेरी नियत मेरी फिदरत..जाने कब कैसी किस्मत ! लौट आना मेरी गली कभी,या मिल जाना किस मोड़ पर […]

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एक साँझ की हलचल – An Evening Swirl

दो झूले और बच्चे कतार में, फीकी हरयाली इस छोटे से बाग में ! पेड़ छोटे, इस शहर की रंगचाल में,दायरा आसमां ने भी समेटा,लंबी लैम्पपोस्टो की आढ़ में ! ऊँघती बेंचे घासों के बीच,सोचते कोई छेड़े कोई किस्सा,इस गुमशुम से हाल में ! सहमे पड़े बरसाती मेंढक,चहल पहल से है बैठे ठिठके ! झुरमुट […]