Poetry

अमरलता के बेले और पेड़ – 100th Poem

चहकती  थी  हर  उस  डाल   पर  बैठी  पंछियाँ, अब  पतझर  सा  लगता , एक ठूंठ  सा खरा पेड़ ! बड़े  सुने  सुने  से  सुनसान  सा  प्रतीत  होता , ना  झूले  है  उस  पर, यूँ  बाट जोहती  टहनियाँ ! कुछ  अमरलता  की  बेले , चढ़  रही  है  ऊपर . ये  प्यार  प्रपंच  ना  जान  सके  मुरझाये  मन  ! अपने  बदन  पर  लिपटी  […]

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बरसों सावन – Waiting For Rain

कैसे सावन आये तुम बिन गहने !छितिज धरा सब धुल उराये,नभ के बदल बन गये पराये, उमड़ घुमड़ तुम आते ऐसे !कसक मन की भी जाती जैसे,जग चर की तुम तृष्णा मिटाते,सूखे नयनों में आके नीर गिराते, पर आये सावन बिन तुम गहने !कोई जैसे चुप चुप से लगे रहने ..!बेकल मन, सुने सपने …बरसों […]