अमरलता के बेले और पेड़ – 100th Poem

चहकती  थी  हर  उस  डाल   पर  बैठी  पंछियाँ, अब  पतझर  सा  लगता , एक ठूंठ  सा खरा पेड़ ! बड़े  सुने  सुने  से  सुनसान  सा  प्रतीत  होता , ना  झूले  है  उस  पर, यूँ  Read More …

बरसों सावन – Waiting For Rain

कैसे सावन आये तुम बिन गहने !छितिज धरा सब धुल उराये,नभ के बदल बन गये पराये, उमड़ घुमड़ तुम आते ऐसे !कसक मन की भी जाती जैसे,जग चर की तुम Read More …